LAC पर लद्दाख तक ही सीमित नहीं है चीनी सैनिकों की घुसपैठ की कोशिश: खुफिया रिपोर्ट

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नई दिल्ली : चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने पिछले दो महीनों में कई बार वास्तविक नियंत्रण रेखा का उल्लंघन किया है। खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार चीनी सैनिकों ने अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और उत्तराखंड के कई स्थानों पर सीमा समझौते का उल्लंघन किया है। एक अधिकारी ने नाम नहीं छपने की शर्त पर यह जानकारी दी है।चीन का यह उल्लंघन केवल पूर्वी लद्दाख तक ही सीमित नहीं था। अधिकारियों और रिपोर्ट्स से पता चलता है चीनी सैनिक भारतीय क्षेत्र के अंदर 40 किमी तक घुस आए थे, जिन्हें बाद में भारतीय सैनिकों ने खदेड़ दिया।
अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय सैनिकों के द्वारा LAC को पार करने के चीनी दावों पर भी विश्वास है। वे बड़ी चीनी रणनीति की ओर भी इशारा करते हैं। अधिकारियों का कहना है कि लगभग 3,500 किमी लंबी सीमा पर गतिविधियों में इजाफा हुआ है। भारतीय जवान किसी भी परिस्थिति ससे निपटने के लिए तैयार हैं।
आपको बता दें कि भारत और चीन के बीच चार महीने से गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। इस दौरान दोनों पक्षों के सैनिकों की जान गई है। 15 जून को पूर्वी लद्दाख के गलवान में एक कमांडिंग ऑफिसर सहित कम से कम 20 भारतीय सेना के जवान शहीद हो गए थे। साथ ही चीन के भी 40 से अधिक जवानों की मौत हो गई थी।
एक खुफिया अधिकारी के अनुसार, जिनका नाम नहीं दिया जा सकता है क्योंकि वह मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत नहीं है, पीएलए ने जुलाई में दो बार अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश किया। उनके अनुसार, चीनी सैनिकों ने जिला अंजाव में भारतीय क्षेत्र के अंदर कम से कम 26 किमी की दूरी तय की और बाहर निकलने से पहले तीन से चार दिनों के लिए डेरा जमाए रखा। इसके अलावा पीएलए ने अरुणाचल के हैडिग्रा दर्रा से होकर 40 किमी की दूरी तय की।
अगस्त की शुरुआत में पूर्वी सिक्किम के जेलेप ला क्षेत्र में दोनों देश के सौनिकों का आमना-सामना हुआ। यहां पीएलए ने ऊंचे इलाके पर कब्जा कर लिया और भारतीय सैनिकों पर पत्थर बरसाए थे। वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद तनाव कम हुआ, लेकिन दोनों पक्ष जेलेप ला क्षेत्र पर अपने दावे पर अड़े रहे। इसके बाद फिर अगस्त के मध्य में पीएलए की उपस्थिति उत्तराखंड के तंजुन ला दर्रा में दर्ज की गई।
सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं बताने पर कहा, “PLA सामरिक और रणनीतिक लाभ हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण ऊंचाइयों पर हावी होने की कोशिश कर रहा है।” हालांकि भारतीय सेना ने कई बदलावों पर आधिकारिक रूप से टिप्पणी नहीं की। सेना ब्रिगेड और डिवीजन स्तर पर जमीनी स्तर की बातचीत में लगी हुई है।
राजनीतिक स्तर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले हफ्ते मास्को में अपने चीनी समकक्ष जनरल वेई फ़ेंगहे के साथ वार्ता की। पिछले शुक्रवार को हुई बैठक में वेई ने भारत को दोषी ठहराया और कहा कि चीन अपने क्षेत्र का एक इंच भी खोने को तैयार नहीं है। राजनाथ सिंह ने अपने चीनी समकक्ष से कहा कि भारत को अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के संकल्प के बारे में कोई संदेह नहीं होना चाहिए। आपको बता दें कि इस सप्ताह के अंत में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक होने वाली है।