बकरों का अनोखा शौकीन! खास प्रजातियों के बकरों को पालने के लिए लाखों खर्च करता है सोहेल अहमद

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भोपाल :  झीलों और नवाबों का शहर कहलाने वाले भोपाल को यहां के लोगों के महंगे शौक के लिए भी जाना जाता है। खान पान में पोहा, चाय, बिरयानी,पान और फालूदा के लिए मशहूर भोपाल के लोग एंटीक और मॉडिफाइड गाड़ियां भी रखने के लिए मशहूर हैं। इन सबके बीच भोपाल का ही एक युवा इन दिनों अपने अनूठे शोक के कारण चर्चाओं में बना हुआ है। इस युवा को देश विदेश के एंटीक और यूनिक बकरे पालने का शौक है और उन्होंने इसके लिए अपने फार्म पर डेढ़ एकड़ जगह में गोट फार्म विकसित किया है जिसमें 10 हज़ार स्क्वायर फ़ीट जगह में टीन शेड भी डाला है। जहां पर विभिन्न यूनिक और एंटीक बकरों की दर्जन भर ब्रीड मौजूद हैं। जिनको शायद डिस्कवरी चैनल पर ही देखा जा सकता है।

दरअसल, भोपाल के प्रसिद्ध परिवार में जन्में कोकता निवासी सोहेल अहमद को बचपन से ही यूनिक और एंटीक बकरे पालने का शौक था जिसको उन्होंने अब एक विशाल गोट फार्म के रूप में विकसित कर लिया है। पिछले दो साल से वो देश के विभिन्न जगहों से यूनिक और एंटीक ब्रीड के बकरे इकट्ठा कर रहे है और उनकी ब्रीडिंग भी करवा रहे हैं।सोहैल का कहना है की उनके पास अभी जो ब्रीड हैं वो सिर्फ डिस्करवी चैनल पर ही दिखाई दे सकती है।उन्होंने अपने बेटे इब्राहिम के नाम पर इब्राहिम गोट फार्म खोला है। फिलहाल अभी वो बकरे बेचने की जगह उनकी ब्रीड को बढ़ाने पर ज़ोर दे रहे हैं।

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मीडिया से बात करते हुए सोहेल ने बताया कि उनके पास जो ब्रीड हैं उसमें ज़िंग ब्रीड है जो लेह लद्दाख की नसल है हाइट में बहुत शॉर्ट हाइट होते हैं बहुत ही यूनिक है। भोपाल के कलाइमेट इसको बहुत कम सूट करता है। सोहेल ने इसके 16 महीने के बकरे को ब्रीडिंग के लिए 60 हज़ार मे मुंबई से मंगाया गया है। एक साल बाद यह बकरा एक से डेढ़ लाख रुपये में बिक जायेगा।इसके बच्चे भी बहुत महंगे बिकते है।

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दूसरी ब्रीड का नाम बेंटम है यह ब्रीड अधिकतर आसाम में और उसके आसपास के प्रदेशों में पाई जाती है। बकरों में यह सबसे छोटी हाइट के होते है। इसके अलावा एक ब्रीड का नाम है यमनी ब्रीड ऐसा माना जाता है कि यह नस्ल यमन देश की प्रजाति है इसलिए इसका नाम है यमनी है। बड़े सींग और बड़े बाल इसकी खूबी है।

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एक और नस्ल जिसको बरबरी नस्ल कहते हैं यह आगरा में पाई जाती है। वही कोटा ब्रीड जो राजस्थान में पाई जाती है। इनकी हाइट और वज़न ज़्यादा होता है और यह आम नस्ल है इंडिया की फेमस नस्ल होती है इसे कोई भी आसानी पाल सकता है।

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सोहेल के पास अलग अलग नस्ल की लगभग 50 बकरियां हैं। इन सबको खाने में चना,गेहूं ,मक्का,लिवर टॉनिक और कैल्शियम दिया जाता है। वही बकरों को दूध भी पिलाया जाता है। सोहेल में अपने गोट फार्म के लिए चार एम्प्लॉयीज रखे है जो इन सब जानवरो की देखभाल करते हैं।