नेपाल में भूकंप: काठमांडू में महसूस किए गए झटके, रिक्टर स्केल पर 4.5 रही तीव्रता; जान-माल के नुकसान की खबर नहीं

हिमालय की तलहटी में स्थित होने के कारण नेपाल भौगोलिक रूप से दुनिया के सबसे संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है। टेक्टोनिक प्लेटों की निरंतर हलचल के कारण यह क्षेत्र हमेशा हाई-अलर्ट पर रहता है। यहाँ अतीत में कई विनाशकारी भूकंप आ चुके हैं, जो जान-माल की भारी तबाही का कारण बने हैं। पिछले साल भी 28 फरवरी की तड़के सुबह 5.5 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया था, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। विशेषज्ञों के अनुसार, हिमालयी बेल्ट में ऊर्जा के निरंतर संचय के कारण नेपाल में छोटे और बड़े झटकों का सिलसिला बना रहता है।

नेपाल की राजधानी काठमांडू में भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर 4.5 रही तीव्रता; जानें क्यों कांपती है धरती?

काठमांडू: नेपाल की राजधानी काठमांडू और इसके आसपास के इलाकों में एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 4.5 मापी गई है। राहत की बात यह है कि इस प्राकृतिक आपदा में अभी तक किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।

भूकंप का केंद्र और प्रभाव

भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, इस भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर नीचे था। झटके इतने प्रभावी थे कि काठमांडू के साथ-साथ पड़ोसी क्षेत्रों में भी लोगों ने कंपन महसूस किया। गौरतलब है कि हिमालय की तलहटी में बसे होने के कारण नेपाल भौगोलिक रूप से भूकंप के प्रति अत्यधिक संवेदनशील (High-Risk Zone) माना जाता है।

पड़ोसी देशों में भी हलचल: एक नजर पिछले रिकॉर्ड पर

नेपाल और उसके आसपास के क्षेत्रों में भूकंपीय सक्रियता लगातार बनी हुई है:

  • पिछला रिकॉर्ड: पिछले साल 28 फरवरी की सुबह नेपाल में 5.5 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था, जिसका असर बिहार (भारत) तक देखा गया था।

  • क्षेत्रीय स्थिति: हाल ही में पाकिस्तान में भी 4.5 तीव्रता का झटका महसूस किया गया था।

  • तिब्बत का आंकड़ा: तिब्बत में स्थिति और भी गंभीर रही है, जहाँ पिछले तीन दिनों में 5 बार और बीते एक महीने में कुल 40 बार छोटे-बड़े झटके दर्ज किए गए हैं। इसकी तुलना में नेपाल में पिछले एक महीने में 5 बार भूकंप आए हैं।

 


विशेष रिपोर्ट: आखिर क्यों आता है भूकंप?

भूकंप आने के पीछे का वैज्ञानिक कारण हमारी धरती की आंतरिक बनावट में छिपा है। विशेषज्ञों के अनुसार:

  1. टेक्टोनिक प्लेट्स की हलचल: धरती की बाहरी सतह (क्रस्ट और ऊपरी मेंटल) 15 बड़ी और छोटी प्लेटों से मिलकर बनी है। ये प्लेटें स्थिर नहीं हैं और लगातार बहुत धीमी गति से इधर-उधर घूमती रहती हैं।

  2. घर्षण और ऊर्जा: जब ये प्लेटें एक-दूसरे के आमने-सामने आती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो घर्षण (Friction) के कारण इनके किनारे अटक जाते हैं।

  3. ऊर्जा का निकलना: ‘यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे’ (USGS) के मुताबिक, जब इन किनारों पर पड़ रहा दबाव घर्षण के बल से ज्यादा हो जाता है, तो अचानक भारी मात्रा में ऊर्जा (Energy) रिलीज होती है।

  4. कंपन का अहसास: यही ऊर्जा लहरों के रूप में धरती की परतों से होकर गुजरती है, जिसे हम भूकंप के झटकों या कंपन के रूप में महसूस करते हैं। इसी तीव्रता को मापने के लिए रिक्टर स्केल का उपयोग किया जाता है।