चीन पर ट्रंप के बदलते रुख़ को उनके समर्थक कैसे देख रहे हैं?
ट्रेड वॉर से रेड कार्पेट तक: चीन पर नरम पड़ते ट्रंप के सुर, MAGA समर्थकों में खामोशी और संशय
वाशिंगटन/बीजिंग:
“चीन अमेरिका का मुख्य आर्थिक प्रतिद्वंद्वी है और हम उसे अपने देश का ‘बलात्कार’ करने की इजाज़त नहीं दे सकते।” साल 2016 में इंडियाना (फ़ोर्ट वेन) की एक चुनावी रैली से शुरू हुई डोनाल्ड ट्रंप की यह आक्रामक चीन-विरोधी बयानबाज़ी एक दशक तक उनकी रैलियों, 2024 के चुनावी अभियान और उनके दूसरे कार्यकाल की पहचान बनी रही।
लेकिन, हाल ही में बीजिंग के ‘ग्रेट हॉल ऑफ़ द पीपल’ में जो कुछ भी हुआ, उसने दुनिया भर के कूटनीतिक जानकारों और खुद ट्रंप के समर्थकों (MAGA) को हैरान कर दिया है। जहाँ कभी दुश्मनी के सुर गूंजते थे, वहाँ अब रेड कार्पेट, झंडे लहराते बच्चे और सौहार्दपूर्ण माहौल दिखाई दे रहा है।
1. ‘लिबरेशन डे’ का तनाव और बीजिंग में ‘दोस्ती’ का दांव
ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में चीन-विरोधी रुख के लिए मशहूर टीम के साथ व्हाइट हाउस पहुँचे थे। विदेश मंत्री मार्को रुबियो, उपराष्ट्रपति जेडी वांस और वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार पीटर नवारो जैसे नेता लगातार बीजिंग पर अमेरिका को ‘लूटने’, टेक्नोलॉजी चुराने और फेंटानिल की तस्करी का आरोप लगाते रहे।
इसके बाद दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक ट्रेड वॉर छिड़ गया:
फरवरी 2025: ट्रंप ने चीनी आयातों पर 10% टैरिफ से शुरुआत की।
अप्रैल 2025 (लिबरेशन डे): यह इम्पोर्ट टैक्स रिकॉर्ड 145% तक पहुँच गया।
चीन का पलटवार: चीन ने भी अमेरिकी सामानों पर 125% जवाबी टैरिफ लगाया और ‘रेयर अर्थ’ (दुर्लभ खनिजों) के निर्यात पर रोक लगा दी।
अचानक बदला रुख
इस भयंकर व्यापार युद्ध के बीच, इस हफ्ते जब ट्रंप बीजिंग पहुंचे, तो उनके सुर पूरी तरह बदले हुए थे। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हाथ मिलाते हुए ट्रंप ने कहा:
“आपके साथ होना सम्मान की बात है। आपका दोस्त होना भी सम्मान की बात है। चीन और अमेरिका के बीच संबंध पहले से कहीं बेहतर होने जा रहे हैं।”
2. व्यापारिक समझौते: क्या कॉर्पोरेट जगत को मिली राहत?
यद्यपि किसी बहुत बड़े और आधिकारिक द्विपक्षीय समझौते की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन ट्रंप ने ‘शानदार ट्रेड डील्स’ की जमकर तारीफ़ की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस यात्रा के दौरान कुछ बड़ी अमेरिकी कंपनियों को बड़ी राहत मिली है:
एनवीडिया (Nvidia): दिग्गज चिपमेकर कंपनी को 10 चीनी कंपनियों को सेमीकंडक्टर बेचने की मंज़ूरी मिली।
बोइंग (Boeing): अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी को चीन से 200 विमानों का बड़ा ऑर्डर मिला।
सिटीग्रुप (Citi): इस अमेरिकी बैंक को चीन में सिक्योरिटीज कारोबार चलाने का लाइसेंस मिल गया।
3. परदे के पीछे का कड़ा रुख और ‘ताइवान’ पर सस्पेंस
नरम बयानबाज़ी और दोस्ताना माहौल के बावजूद, जमीनी हकीकत अब भी जटिल बनी हुई है। रिपब्लिकन पार्टी का पारंपरिक चीन-विरोधी रवैया पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध: इस शिखर बैठक से महज एक हफ्ते पहले, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने तीन चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए। उन पर आरोप है कि उन्होंने मध्य-पूर्व में अमेरिकी बलों पर हमलों के लिए ईरान को सैटेलाइट तस्वीरें मुहैया कराई थीं।
ताइवान का सबसे बड़ा मुद्दा: ताइवान को हथियार बेचने का मुद्दा अब भी अधर में है। ट्रंप ने 14 अरब डॉलर की लंबित हथियार बिक्री पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी, जिसे दोनों ही दलों (डेमोक्रेट और रिपब्लिकन) के सीनेटर बेहद जरूरी मान रहे हैं।
एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, “ताइवान के मुद्दे पर शी जिनपिंग बहुत मज़बूती से सोचते हैं। मैंने किसी भी तरफ़ कोई प्रतिबद्धता नहीं दी है।” उन्होंने कहा कि वह इस पर जल्द फैसला लेंगे।
4. बयानों में अंतर: व्हाइट हाउस बनाम बीजिंग
इस बैठक के बाद दोनों देशों द्वारा जारी आधिकारिक बयानों में भारी अंतर देखने को मिला, जो भविष्य के टकरावों की ओर इशारा करता है:
| पक्ष | आधिकारिक रुख / बयान |
| चीन (बीजिंग) | ताइवान को सबसे अहम मुद्दा बताया। चेतावनी दी कि यदि यह मुद्दा हल नहीं हुआ, तो “टकराव और संघर्ष हो सकता है, जिससे संबंध गंभीर ख़तरे में पड़ सकते हैं।” |
| अमेरिका (व्हाइट हाउस) | बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में ‘ताइवान’ शब्द का कोई ज़िक्र तक नहीं किया गया। |
5. ‘MAGA’ खेमे में खामोशी और जानकारों की राय
ट्रंप के इस बदले रुख पर उनके कट्टर समर्थक (Make America Great Again – MAGA) और कैपिटल हिल के रिपब्लिकन नेता हैरान हैं।
स्टीव बैनन (ट्रंप के पूर्व रणनीतिकार): उन्होंने चीन के बयान को सीधी धमकी मानते हुए ‘पोलिटिको’ से कहा, “मैं हैरान हूँ। लोग इसे सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश कह रहे थे, लेकिन शी जिनपिंग ने शुरुआत ही धमकी से की। यह बिल्कुल खुला और साफ था।”
नेताओं की चुप्पी: हालांकि, कैपिटल हिल में चीन पर सख्त रुख रखने वाले ज्यादातर रिपब्लिकन नेता इस यात्रा और ताइवान पर ट्रंप के अस्पष्ट बयान के बाद पूरी तरह खामोश हैं।
क्या फेल रही ट्रंप की पुरानी नीति?
‘जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश फ़ाउंडेशन फ़ॉर यूएस-चाइना रिलेशंस’ के अध्यक्ष और सीईओ डेविड फ़ायरस्टीन के अनुसार, यह चुप्पी अस्वाभाविक नहीं है। उन्होंने कहा:
“अगर एक साल में ऐसी 50 बैठकें भी हो जाएं, तब भी यह सच नहीं बदलेगा कि कुछ मुद्दों पर अमेरिका और चीन कभी सहमत नहीं हो सकते। इसका मतलब यह नहीं कि यह बैठक असफल थी।”

