मध्यप्रदेश पुलिस के संरक्षण में संत स्वामी अशुतोषानंद पर गुंडों ने किया जानलेवा हमला।
सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना किया मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले की पुलिस"।

शिवपुरी (मध्यप्रदेश)/नई दिल्ली : घटना 15 फरवरी 2022 को मध्य प्रदेश जनपद शिवपुरी थाना सतनवाड़ा के अंतर्गत आने वाले गांव विनैगा स्थित परमहंस आश्रम के अंदर घटित हुई घटना क्रम में बताया गया कि जिस मामले में आश्रम के अधिष्ठाता परमहंस स्वामी श्री बज्रानन्द जी महाराज के शिष्य एवं ब्रह्मलीन स्वामी जी द्वारा स्थापित ‘भारतीय संस्कृति सुरक्षा एवं मानव कल्याण समिति ट्रस्ट’ के सर्वसम्मति से निर्वाचित अध्यक्ष स्वामी श्री आशुतोषानंद जी को भू माफियाओं द्वारा कराये गये एक झूठे केस में माननीय सर्वोच्च न्यायालय से 11 फरबरी को अग्रिम जमानत मिली और अगले दिन उसी मामले की जांच में सहयोग के बहाने विवेचक श्री अरविंद छारी के फोन कॉल पर सतनवाड़ा थाने आशुतोषानंद जी दिनांक 14 फरवरी 2022 को पहुंचे और शाम तक इंतज़ार किया किंतु विवेचक अधिकारी जानबूझकर स्वामी जी से नहीं मिले। उन्होंने विवेचक के फोन पर अपनी वापसी का संदेश भेज कर वापस हुए अगले दिन आने की कह कर दिनांक 15 फरवरी 2022 को जब थाने आशुतोषानंद जी पहुंचे तो विवेचक ने उन्हें हिरासत के नाम पर एक पत्र पर दस्तखत कराकर अपनी कस्टडी में सरकारी गाड़ी में बैठाकर आश्रम के लिए रवाना हो गए। स्वामी जी के शिवपुरी आने की खबर पाकर भक्तगण भी उनके पीछे वहां पहुंच गए थे क्योंकि उन्हे वहाँ किसी अनहोनी की आशंका भी थी। पर भक्तों को विवेचक ने व गुंडा गैंग लीडर रविंद्र उर्फ पथरानंद के निर्देशानुसार एवं पूर्व नियोजित प्लानिंग के मुताबिक आश्रम के गेट पर ही पहले से मौजूद 7-8 लोगों ने रोक दिया और स्वामी आशुतोषानंद को अकेले ही आश्रम के अंदर ले जाया गया वहाँ स्थित सभी गुंडे उनके चारों ओर से घेरे हुए थे जबकि दिल्ली से चलने के पूर्व ही स्वामी जी ने पुलिस अधिक्षक शिवपुरी को ईमेल भेजकर निवेदन किया हुआ था कि उनकी जान का खतरा है उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए। सुरक्षा देने की बजाय उन्हें ज्यादा से ज्यादा असुरक्षित किया गया और पुलिस की साजिशन आशुतोषानंद जी को गुंडों द्वारा पिटवाया गया, अपमानित कराया गया। प्रतिवाद करने पर उनकी जान भी जा सकती थी तथा आई. जी. ग्वालियर को उन्होंने पूर्व में ही जाँच उच्च अधिकारी से अन्य जिले में कराने के लिए प्रार्थना की थी क्योंकि पहले ही उन्हे जाँच की निस्पछ्ता पर संदेह था, क्योंकि विवेचक द्वारा संत अशुतोषानन्द को अपने जन्मदात्री माता पिता को लाकर DNA Test कराने के लिए बोला जा रहा था ज्ञातव्य है कि संत महात्मा सन्यास के बाद पिंड दान भी कर देते हैं उनका घर परिवार से कोई संबंध नही रहता, सन्यास लेना संतो का पुनर्जन्म होता है, परंतु सुनयोजित तरीके से उनको प्रताड़ित किया जा रहा था भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीशों के आदेश की भी अवमानना की गयी और अग्रिम जमानत के बावजूद पुलिस ने उन्हें कस्टडी में लेकर कानून के राज की धज्जियां उड़ाई और यह भी प्रदर्शित किया कि पुलिस से बड़ा कोई नहीं, पुलिस ही देश चलाएगी न्याय व्यवस्था एवं चुनाव व्यवस्था उनकी जेब में रहती है जैसा कि ब्रिटिश इंडिया में साम्राज्यवादी व्यवस्था के दौर से चलता आया है।
जब स्वामी आशुतोषानंद गुंडों द्वारा अपमानित व मार खा रहे थे उन्होंने विवेचक पुलिस अधिकारी को पुकार कर कहा भी कि देखिए यह सब आप की मौजूदगी में हो रहा है तब वहां ठहाके गूंज गए और पिटाई लगा रहा एक गुंडा बोला अरे दरोगा क्या है हमारा तो एसपी भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता। इन अल्फाजों को सुनने के बाद तो यही कहा जा सकता है कि सत्ता नहीं देश में सत्ता का मंचन चल रहा है जहां आवाम की जिंदगी हर वक्त खतरे में है तथा “परित्राणाय साधूनाम, विनाशाय च दुष्कृताम्” अवतार दर्शन का दम निकल चुका है इस घटना के बाद से स्वामी आशुतोषानंद गहरे सदमे में है बिस्तर पकड़ रखा है, सदमे में ही चिल्ला उठते हैं अरे रामराज्य तो नहीं आया रावण राज्य अवश्य आ गया मध्यप्रदेश में संतों का उत्पीड़न लगातार हो रहा है। आदरणीय प्रधानमंत्री जी के संकल्प नये भारत की शिवपुरी जिले की पुलिस के द्वारा धज्जियां उड़ाई जा रही हैं पालघर महाराष्ट्र, बाघ्म्बरी गद्दी प्रयागराज, भैय्यू महाराज इंदौर दुष्ट जनों की प्रताड़ना का शिकार हुए और जान से हाथ धो बैठे इस नागवार अरुचिकर स्थिति के लिए समूची राजनीतिक बिरादरी एवं राजनीतिक चिंतन जो वोट यानी सत्ता और नोट से आगे की सोचती ही नहीं। संतो यानी सज्जनों और देश दोनों को गर्त में ढकेल रही है।
‘सुनवाई नहीं कार्यवाही नहीं तो काहे की सत्ता’।
स्वामी जी ने इस मामले में न्यायिक जांच की आदेश दे सरकार, थानाध्यक्ष सतनवाड़ा पर करवाई हो और स्वामी जी को सुरक्षा मुहैया करवाया जाए।
