नये भारत में संतों का उत्पीड़न रूके: स्वामी आशुतोषानन्द
संत एंव संस्कृति सुरक्षा आयोग का गठन हो।

भारत के अब तक के सर्वाधिक लोकप्रिय माननीय प्रधानमंत्री जी अकारण ही ऐसा नहीं कह रहे की भ्रष्टाचार देश को खोखला कर रहा है। भारत को साम्राज्यवाद से मुक्ति तो मिल गई किंतु उसके तौर-तरीकों प्रशासनिक कार्यशैली प्रशासनिक ढांचा पुलिस संगठन कानून की किताबों का भारत आज भी मोहताज है। जिनको जनता का सेवक होना चाहिये था वह जनता का मालिक बन रहे हैं। तैलंगाना के मुख्यमंत्री ने तो संविधान को नये सिरे से लिखने की ही बात कही है। इससे यह प्रतीत होता है कि आजादी के बाद शासन की जो डगर भारत ने अपने लिए निश्चित की उस पर चलते हुए देश के लोगों के प्रति जो उस डगर के आधार हैं उस चिंतन में कहीं कोई परिवर्तन नहीं आया।
आज भारत 75 वर्ष पूरे होने पर आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है लेकिन अमृत की शोध करने वाले महात्मा इस लोकतांत्रिक व्यवस्था के इतने वर्ष पूरे होने के बावजूद भी प्रताड़ित हो रहे हैं। संसार में मनुष्य के पास एक दूसरे को देने के लिए दुःख के सामान के अलावा कुछ भी नहीं है जो भी वस्तु दी जाती है वह एक दिन नष्ट होगी और दुःख का कारण बनेगी, वास्तविक एवं स्थायी संपति केवल महात्मा ही दे सकते है जो आप की आत्मा के साथ जुड़ कर इस लोक में तथा परलोक में भी सुख एवं शांति देती है एक आम आदमी का मूल्य एवं महत्व यथास्थिति की कैद में है उसे अपनी स्थिति से मुक्ति नहीं मिली वह सत्ता का केंद्र बिंदु बनने से अभी भी वंचित है। गरिमामय जीवन का संवैधानिक भरोसा आम आदमी के खाते से इतने लंबे अंतराल के बाद भी गायब ही है। सत्य और झूठ के बीच लटके हुए नौकरशाही के हाथों अपमानित होते हुए, एक निर्दोष आम आदमी को पुलिस की प्रताड़ना एवं झूठी FIR देखकर भी यदि लोकतंत्र शर्मिंदा नहीं होता तो उसके छद्मवेश पर किसी को तरस ही आ सकता है। सच यही है कि ‘सत्ता नामे लोकतंत्र और सत्ता कामे राजतंत्र’ इस दो सिर वाली व्यवस्था के कारण ही भ्रष्टाचार की जड़ें देश को खोखला कर रही हैं। इसलिए कि सत्य के प्रति इस देश का जो आग्रह था प्रतिबद्धता थी जिसके लिए भगत सिंह जैसे लोग एक आजाद एवं संपन्न राष्ट्र के निर्माण हेतु जीवन की परवाह किये बगैर हाथों में गीता लेकर फाॅंसी के फन्दे पर झूल गये वह प्रतिबद्धता अब तक सोई हुई है। सब आंख मूंदकर चल रहा है। शासक वर्ग की दृष्टि में सत्य और झूठ का फर्क ही मिट गया है।
अंग्रेजों की कानून की पोथियां हर मर्ज की दवा बन गई है। संस्कारित शिक्षा, चरित्र निर्माण और सत्य पर भरोसा इसी उधेड़बुन में कहीं पीछे छूट गए हैं। झूठ अब किसी भी राजपुरुष, विद्वत-जनों व देश के शुभचिंतकों को बेचैन नहीं करता वह जीवन में घुल मिल गया है। फिर भी एक संत की पुकार है कि सत्य, संस्कार और चरित्र की अवहेलना करके अंग्रेजों की कानून की पोथियों के बूते भारत कभी विश्व गुरु नहीं बन सकता। उसे सत्य, संस्कार और चरित्र निर्माण की डगर पकड़नी ही पड़ेगी। मध्य प्रदेश जिला शिवपुरी ग्राम विनैगा स्थित परमहंस आश्रम के संदर्भ में सत्यान्वेषण का प्रयास सत्याग्रह की दिशा में चलने का संकल्प सिद्ध हो सकता है जिसकी शुरुआत कर ही देनी चाहिए। आज शिवपुरी जिले की पुलिस कानून की प्रक्रियाओं का दुरूपयोग कर यह बताने का प्रयास कर रही है कि आपने महात्मा होने के बाद सरकार को क्यों नहीं बताया इसलिए आप को रिमांड में लेकर पूछताछ की जायेगी। यह संतो को प्रताड़ित करने के साथ मानवाधिकारों का भी हनन है।
क्या भारत के महात्माओं को अब इसलिये जेल में डाला जायेगा कि वह बिना सरकार को बताये महात्मा कैसे बन गए, कोर्ट में जाकर उनको महात्मा होने के सबूत देने होंगे?
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की पुलिस के कृत्य से ऐसा लग रहा है कि भारत के सभी महात्माओं को अब पुलिस रिमांड में लेकर पूछेगी कि बिना सरकार को बताये आप महात्मा कैसे बन गये, मध्य प्रदेश पुलिस का यह कृत्य आदरणीय प्रधानमंत्री जी के नये भारत के संकल्प के विपरीत है | मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री जी को इस संबंध में स्वामी आशुतोषानन्द के द्वारा पत्र भी लिखा गया है और उनसे जाँच करा कर दोषी लोगों के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए कहा गया है अन्यथा भारत में स्थित 450 परमहंस आश्रम एवं अन्य आश्रम के महात्मा, अत्याचार और अन्याय के खिलाफ आंदोलन का रास्ता चुनेंगे|
भू माफिया, गुंडे व अपराधी तत्वों का संगठित गिरोह मध्य प्रदेश के जनपद शिवपुरी के गांव विनैगा स्थित प्रसिद्ध परमहंस आश्रम के महात्मा एवं भारतीय संस्कृति सुरक्षा एवं मानव कल्याण समिति ट्रस्ट के निर्वाचित अध्यक्ष स्वामी आशुतोषानंद शिष्य परमहंस स्वामी श्री बज्रानन्द जी महाराज अधिष्ठाता परमहंस आश्रम विनैगा, शिवपुरी म.प्र. का भूमभियाओं द्वारा उत्पीड़न हो रहा है। मध्यप्रदेश के आदरणीय मुख्यमंत्री जी को पुलिस की मिलीभगत एवं कारगुजारियों को पत्र द्वारा अवगत कराया गया है तथा भरोसा है कि आश्रम के हालात पर विचार करते हुए उसे अवैध कब्जेदारों से मुक्त कराने का प्रयास होगा और स्वामी आशुतोषानन्द को न्याय मिलेगा। जिस कारण वो आज दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं उन्हें रहने का कोई ठिकाना मिलेगा जिससे वह अपने गुरु महाराज के अधूरे कार्य को पूरा कर सकें और ट्रस्ट के दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे|
ज्ञातव्य हो कि परमहंस स्वामी श्री बज्रानन्द जी महाराज शिष्य स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज उन महापुरुषों में से हैं जिन्होंने उदार चरिता नामतु वसुधैव कुटुंबकम सिर्फ जिह्वा से उच्चारण तक ही सीमित नहीं रहे वरण इस संदेश को उन्होंने चरितार्थ भी किया। सभी प्राणियों मतावलंबियों के लिए उनके हृदय में उमड़ता अगाध प्रेम उन्हें विश्व मानव बना गया। अपने जीवन काल में उन्होंने अपने शिष्य स्वामी आशुतोषानंद के साथ इंडोनेशिया में विश्व हिंदू सम्मेलन को संबोधित किया और उनके बीच 8 सार्वभौमिक धर्म-सिद्धांतों को प्रसारित किया जिनको अपनाकर मानव जाति को संघर्ष से बचाया जा सकता है- (1) संपूर्ण मानव का धर्म एक है, (2)सम्पूर्ण विश्व का मानव एक है, (3) सबका इष्ट एक है, (4) संपूर्ण विश्व का ईश्वर एक है, (5)ईश्वर प्राप्ति का मार्ग एक है,(6)ईश्वर प्राप्ति का स्थान एक है,‘हृदय देश’,(7)सबके दुखों का कारण एक है,’अविद्या जनित संस्कार’, (8)दुखों से छूटने का उपाय एक है ‘संस्कारों से हीन मन की पूर्ण निर्मलता’ | इनमें से यदि कुछ भी दो हैं तो वह मानव के दुख एवं पतन का कारण है। यह उनका मुख्य संदेश था। अपने गुरुदेव विश्व गुरू परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानन्द जी द्वारा अनुदित भाष्य ‘यथार्थ गीता’ का इंडोनेशिया की भाषा में अपने शिष्य स्वामी आशुतोषानंद के सहयोग से अनुवाद करवाया तथा वहां निरंतर वितरित करवाया। स्वामी जी कहा करते थे कि सबका धर्म एक ही है यह अनेक नहीं हो सकते क्योंकि सबका ईश्वर एक है लोगों की परंपराऐ, खान- पान एवं रहन-सहन अलग हो सकते हैं। परंपराओं के भ्रम में पड़कर आपस में खून- खराबा करना अमानवीय है ना कि धार्मिक होने का प्रमाण क्योंकि धार्मिक व्यक्ति कभी हिंसक नहीं हो सकता यह दोनों विपरीत बातें हैं उन्होंने इस संदर्भ में ‘सबका धर्म एक है’ पुस्तक लिखी तथा पातंजलि कृत ‘योग-दर्शन’ पर भाष्य भी लिखा है। जिसका स्वामी आशुतोषानन्द द्वारा अंग्रेजी व इंडोनेशियन भाषा में अनुवाद कराया गया और करोड़ों लोगों के लिए उनकी भाषा में सुलभ कराया गया। स्वामी जी की देह त्याग के बाद गैरकानूनी तरीके से कब्जा जमा कर बैठे लोगों द्वारा धर्म के प्रसारण के लिए अधिष्ठित परमहंस आश्रम आज कुछ कारोबारी भू माफियाओं का अड्डा बन गया है, जो अपने धन, भाड़े के गुंडों व स्थानीय नेता टाइप लोगों एवं स्थानीय पुलिस के सहयोग से आश्रम की छवि खराब कर रहे हैं और उनके शिष्य स्वामी आशुतोषानंद को भयभीत कर के उन्हें आश्रम छोड़ने पर मजबूर कर दिया है। स्वामी आशुतोषानंद की गैर हाजिरी में उनके कमरे का ताला तोड़कर उनका बेशकीमती सामान एवं दस्तावेज लूट लिये। इस लूट की सूचना स्वामी आशुतोषानंद जी ने दिनांक 14 जून 2021 को माननीय जिलाधिकारी शिवपुरी तथा बाद में एसपी शिवपुरी को दिया किंतु घटना की रिपोर्ट पुलिस ने दर्ज नहीं की। उल्टे स्वामी आशुतोषानंद जी के खिलाफ 1 जुलाई 2021 से लेकर 19 सितंबर 2021 तक तीन एफ आई आर पुलिस ने पहुंच व धनबलियों के इशारे पर दर्ज कर दी। 6 जनवरी 2020 को स्वयं एस.एस.पी. महोदय शिवपुरी एवं सतनबाड़ा थाने के लोग आश्रम के भंडारा कार्यक्रम में आये थे जिसकी सम्पूर्ण व्यवस्था स्वामी आशुतोषानन्द के निर्देशन में आयोजित थी जिसमें 1 लाख से अधिक लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया वही पुलिस ग्वालियर के एक व्यक्ति के कहने पर यह एफ आई आर लिख रही है कि वह महात्मा नहीं हैं जबकि उनके किसी गुरूभाई या ट्रस्ट के व्यक्ति ने यह आरोप नहीं लगाया है क्या भारत के सभी महात्माओं को अब थाने और कोर्ट में जाकर अपनी परंपराओं के पालन की अनुमति लेनी पड़ेगी? क्या उन्हें यह बताना होगा कि वह महात्मा हैं या नहीं। इससे स्पष्ट हो रहा है कि स्थानीय भूमाफियाओं की आश्रम हड़पने की मंशा है जिसमें राजनीतिक एवं सत्ताधारी लोगों का समर्थन है जिसकी जांच होनी चहिऐ। पहली एफ आई आर परमहंस आश्रम घोड़ी के सेवादार को बोलकर जनपद पलवल के थाना चांदहट में दर्ज कराई गई। दूसरी एफ आई आर जनपद पलवल के थाना मुंड़कटी में पलवल के रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी जगमोहन तेवतिया ने अपने ट्रांसपोर्ट व्यवसायी बेटे नवनीत तेवतिया से दर्ज कराई। माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्चन्यायालय के आदेश से आई.जी. पुलिस, रेवाड़ी की जांच में थाना चांदहट में दर्ज मामला झूठा पाया गया एवं एफ आई आर दर्ज कराने वाले सेवादार के विरूद्ध कानूनी कार्यवाही का आदेश भी पारित हुआ।
जांच में थाना मुंडकटी में दर्ज एफआइआर आधारहीन पाई गई। बौखलाए भू माफिया गैंग ने ग्वालियर के एक व्यक्ति के नाम से तीसरी एफ आई आर मध्य प्रदेश के जनपद शिवपुरी के थाना सतनवाडा में दर्ज कराई। जिसमें रिपोर्ट करने वाले ने यह स्वीकार किया है कि स्वामी आशुतोषानंद के कमरे की सफाई करते समय कुछ दस्तावेज मिले। स्वामी आशुतोषानंद जिसे अपने कमरे की लूट बता रहे हैं भू माफिया गैंग उसे सफाई करना बता रहा है। विदित हो कि 14 जून 2021 के पूर्व उनके 40 वर्ष के जीवन काल में भारत के किसी कोने में स्वामी आशुतोषानंद के विरुद्ध कोई शिकायत दर्ज नहीं पाई हुई और ना ही उनका कभी कोई अपराधिक इतिहास रहा बल्कि स्वामी आशुतोषानन्द 2014 में शिवपुरी की जनसभा में हजारों लोगों के बीच मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी के द्वारा पूज्य ब्रह्मलीन गुरुदेव स्वामी श्री बज्रानन्द जी के साथ मंच साझा करते हुए सम्मानित हुए और आज उन्हीं के खिलाफ शिवपुरी की पुलिस यह रिपोर्ट लिख रही है कि वह महात्मा नहीं हैं और उन्होंने अपना 2013 में आशुतोषानन्द नाम से फर्जी आधार कार्ड बनवा लिया और माननीय सुप्रीम कोर्ट से उनको हिरासत में लेकर रिमांड मांगी है। जब स्वामी आशुतोषानंद जी ने आश्रम स्थित अपने कमरे का ताला तोड़कर सामान लूटे जाने की लिखित शिकायत माननीय डीएम शिवपुरी को देकर गैंग के विरुद्ध एफआइआर दर्ज करने की प्रार्थना की उसके बाद से ही पेसबंदी में स्वामी आशुतोषानन्द जी के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराने का अभियान भूमाफिया गैंग ने अपने प्रभाव वाले इलाकों में छेड़ दिया। ढाई महीने के अंदर तीन एफ आई आर और आगे भी यह सिलसिला जारी रहे तो भी कोई ताज्जुब नहीं होगा क्योंकि गैंग के प्रभाव वाले इलाकों की पुलिस उनके घर की पुलिस की तरह काम कर रही है आज भ्रष्टाचार इस तरह हावी हो रहा है कि उसे कहीं से भी पैसा मिले कैसे भी मिले उद्देश्य सिर्फ पैसा है उसे सत्य असत्य से क्या लेना-देना। अंग्रेजों की साम्राज्यवादी पुलिस व्यवस्था ऊपर से स्वदेशी राजपुरूषों का आशीर्वाद फिर लेन-देन में हिचक कैसी। भ्रष्टाचार में लिप्त सभी लोगों की संपति की जांच होनी चहिऐ।
स्वामी आशुतोषानन्द जी ने आदरणीय प्रधानमंत्री जी से आग्रह किया है कि सरकार को संत एवं संस्कृति सुरक्षा आयोग के गठन पर शीध्र विचार करना चाहिऐ। जब उत्पीड़न रोकने के लिए महिला विकास आयोग, गौ सेवा आयोग, पशु आयोग, बाल विकास आयोग आदि की स्थापना हो सकती है तो संत एवं संस्कृति सुरक्षा आयोग क्ंयो नहीं? किसी देश की वास्तविक पहचान उस देश की संस्कृति से होती है इस देश की संस्कृति का निर्माण संत एवं महात्माओं ने किया जो इतना विकृत होने पर भी आज विश्व की सर्वश्रे्रष्ठ संस्कृति है। यह सभी विद्वतजनों से विचारणीय है कि क्या हम संत-महात्माओं को प्रताड़ित करके एक श्रेष्ठ और नये भारत का निर्माण कर सकते हैं।
Jtoday
