जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलपति प्रोफेसर मज़हर आसिफ का हज से लौटने पर एयरपोर्ट पर गर्मजोशी से स्वागत नई दिल्ली: हज की पवित्र यात्रा पूरी कर स्वदेश लौटने पर जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलपति प्रोफेसर मज़हर आसिफ और उनकी पत्नी का नई दिल्ली एयरपोर्ट पर जामिया समुदाय की ओर से भव्य, गरिमामय और आत्मीय स्वागत किया गया।

नई दिल्ली: हज की पवित्र यात्रा पूरी कर स्वदेश लौटने पर जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलपति प्रोफेसर मज़हर आसिफ और उनकी पत्नी का नई दिल्ली एयरपोर्ट पर जामिया समुदाय की ओर से भव्य, गरिमामय और आत्मीय स्वागत किया गया। इस अवसर पर जामिया मिलिया इस्लामिया के रजिस्ट्रार प्रोफेसर मोहम्मद महताब आलम रिज़वी, वरिष्ठ शिक्षकगण, विभिन्न संकायों एवं केंद्रों के डीन और निदेशक, विभागाध्यक्ष, गैर-शिक्षण कर्मचारी तथा जामिया से जुड़े बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। सभी ने पूरे सम्मान और आत्मीयता के साथ उनका स्वागत किया, पुष्पगुच्छ भेंट किए तथा हज की मुबारक यात्रा पूरी करने पर शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।

एयरपोर्ट का वातावरण आध्यात्मिक भावनाओं, श्रद्धा, सौहार्द और उल्लास से सराबोर दिखाई दिया। जामिया समुदाय के सदस्यों ने प्रोफेसर मजहर आसिफ और उनकी पत्नी को हज की बधाई देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, कुशलता, हज की स्वीकार्यता तथा भविष्य में शिक्षा और समाज के क्षेत्र में और अधिक योगदान के लिए शुभकामनाएँ एवं दुआएँ दीं। उपस्थित लोगों का कहना था कि हज केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक महान आध्यात्मिक अनुभव है, जो व्यक्ति के विचार और व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तन लाता है तथा सेवा, भाईचारे, सहिष्णुता और मानवता के मूल्यों को और अधिक सुदृढ़ करता है।
इस अवसर पर जामिया के शिक्षकों और कर्मचारियों ने यह आशा भी व्यक्त की कि कुलपति इस पवित्र यात्रा से प्राप्त आध्यात्मिक अनुभवों और प्रेरणाओं के साथ जामिया मिलिया इस्लामिया की शैक्षणिक, शोध और प्रशासनिक प्रगति को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे। उपस्थित लोगों ने इस यात्रा को न केवल प्रोफेसर मजहर आसिफ और उनके परिवार के लिए सौभाग्यपूर्ण बताया, बल्कि इसे जामिया मिलिया इस्लामिया के लिए भी शुभ और मंगलकारी माना।
स्वागत समारोह के दौरान कई भावुक और सम्मानजनक दृश्य देखने को मिले, जहाँ जामिया समुदाय के सदस्यों ने अपने प्रिय कुलपति के प्रति सम्मान, स्नेह और शुभेच्छा व्यक्त करते हुए इस अवसर को सामूहिक खुशी, आत्मीयता और आध्यात्मिक जुड़ाव का प्रतीक बताया।