मातृभाषा ईश्वर का अनमोल तोहफा है : प्रो. अकील अहमद
भारत में लगभग 19 हजार भाषाएँ बोली जाती हैं और भारत के संविधान में 22 भाषाओँ को स्थान प्राप्त है।

जर्नलिज्म टुडे संवाददाता
नई दिल्ली: राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद नई दिल्ली में केसी बलानी सोसाइटी के सभागार में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का आयोजन किया गया। इस प्रोग्राम में सिंधी परिषद द्वारा सिंधी विशेषज्ञो डॉ नंदलाल जोतवाणी विंग कमांडर (वेटेरन), श्री श्रीकांत भाटिया भूतपूर्व उपाध्यक्ष सी एनसीपीएसएल, एवं मुख्य संपादक– संवाद सिंधी, शम्भू जयसिंघानी, शंकर मूलवानी रंगमच के वरिष्ठ व्यक्तित्व एवं प्रसिद्ध सिंधी गायिका श्रीमति नीतू मटाई को अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया।
इस अवसर पर परिषद के निदेशक प्रो. अकील अहमद ने कहा कि मातृभाषा दिवस की शुरुआत वर्ष 2000 से हुई है, भारत में लगभग 19 हजार भाषाएँ बोली जाती हैं और भारत के संविधान में 22 भाषाओँ को स्थान प्राप्त है। उन्होंने यह भी कहा कि मातृभाषा हमारे लिए ईश्वर का अनमोल तोहफ़ा और वरदान है, मातृभाषा हमारे भाव अभिव्यक्ति की प्रथम सीढ़ी होती है तथा भाषा के बारे में हमें जानकारी मातृभाषा के माध्यम से ही मिलती है, इसलिए इसकी अहमियत को समझने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी देश के विकास में मातृभाषा की बहुत अहम भूमिका होती है इसलिए आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी एवं शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने “नई शिक्षा नीति”में मातृभाषा को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है और इसमें प्राइमेरी शिक्षा मातृभाषा में दिए जाने पर जोर दिया गया हैI निदेशक महोदय ने आगे कहा कि हमारी युवा पीढ़ी को अपनी मातृभाषा की सही जानकारी होनी चाहिए और उसका अनुसरण करते हुये देश की उन्नति में अपनी भागीदारी और योगदान देने की जरूरत है, अपनी मातृभाषा का अनादर नही करना चाहिए साथ ही किसी भी मातृभाषा का निरादर मतलब माँ का निरादर है, माँ, माटी और मातृभाषा हमेशा से हमारे आराध्य रहे हैं और रहेंगे। आज अगर हम किसी भी विकसित देश की बात करे तो अपनी मातृभाषा को लेकर जो उनका प्रेम है हमे भी अपनी मातृभाषा के प्रति ऐसा ही भाव रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के अन्दर हजारों भाषाएँ छुपी हुई हैं सभी मातृभाषाएं एक दूसरें की पूरक हैं हमे किसी भी भाषा से नफरत नही होनी चाहिए I यह जग जाहिर है चाहे हम चीन की बात कर ले या फिर फ्रांस की,कोई भी देश अगर विकास के उच्चतम बिन्दु पर है तो कही न कही उनकी इस सफलता के पीछे उनकी अपनी मातृभाषा एक बहुत बड़ी वजह है। प्रो अकील अहमद ने सिन्धी भाषा के विकास और राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद की उपलब्धियों पर भी रौशनी डाली।
उल्लेखनीय है कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो नागेश्वर राव ने मातृभाषा दिवस के अवसर पर यूनिवर्सिटी में सिन्धी-हिन्दी अनुवाद में पीजी डिप्लोमा कोर्स आरंभ करने की घोषणा की है,जिसका सिंधी भाषा विकास परिषद के निदेशक ने स्वागत किया और कहा कि इससे लोगों को सिन्धी भाषा सीखने और इसमें महारत हासिल करने में मदद मिलेगी। इस कार्यक्रम में सभी सम्मानीय अतिथियों द्वारा भी यह संदेश दिया गया और मातृभाषा के महत्व को काफी विस्तार से समझाया तथा बताया कि मातृभाषा के माध्यम से ही हम अन्य भाषा की जानकारी प्राप्त करते हैं और हम विकास की सीढ़ी चढ़ते हैं। इस अवसर पर परिषद के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी गण व सिंधी समुदाय से भारी संख्या में पधारे व्यक्तिगण मौजूद रहे ।
