कुर्बानी दिखावा नहीं बल्कि यह एक इबादत है: जावेद कैसर

औराई: ईद उल अजहा (बकरीद) एक पवित्र ऐतिहासिक पर्व है यह त्योहार पैगंबर हजरत इब्राहिम की सुन्नत की अदायगी का नाम है। जावेद कैसर ने कहा इस पर्व का मूल संदेश यह है कि एक इंसान अपने रब की रजामंदी के लिए अपना सब कुछ बलिदान कर सकता है। पैगंबर हजरत इब्राहिम ने सपने में देखा कि अल्लाह ने सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी मांगी अपने सपने की बात पैगंबर इब्राहिम ने अपने बेटे इस्माईल को बताया। अल्लाह की बंदगी में इस्माईल कुर्बानी देने को तैयार हो गये, पैगंबर इब्राहिम ने आंखों पर पट्टी बांधे फिर बेटे के गर्दन पर छुरी फेर दी, अल्लाह को यह बंदगी पसंद आई और छुरी लगने से पहले इस्माईल को हटा कर मेमने को रख दिया गया उसके के पश्चात ही अल्लाह की बंदगी में ईद उल अजहा के मौके पर जानवर की कुर्बानी दी जाती है। युवा कमेटी के अध्यक्ष जावेद कैसर ने कहा कि कुर्बानी का त्योहार जिलिह्ज्जा कि दसमीं तारीख से शुरू होता है और 11वीं और 12 वीं तारीख तक होते हैं
कुर्बानी दिखावा नहीं बल्कि यह एक इबादत है इस्लाम में इबादत इंसान की पाक नीयत को पूरा करने का नाम है, उन्होंने खुलें स्थान पर कुर्बानी करने से परहेज करने और कुर्बानी के जानवरों की तस्वीर सोशल मीडिया पर नहीं डालने की अपील की इस अवसर पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें बकरीद आपसी भाईचारा एवं संद्भावनाओं के साथ मनाएं बकरीद के नमाज के बाद कुर्बानी की जाती है कुर्बानी के मांस को तीन हिस्सों में बांटा जाता है एक हिस्सा स्वयं रखते हैं दूसरा संबंधी और पड़ोसी एवं तीसरा हिस्सा गरीबों में बांटा जाता है जावेद कैसर ने बताया कि नूरी जमा मस्जिद नयागांव घाट मोहल्ले में बकरीद की नमाज सुबह 7:00 बजे अदा की जाएगी
