आज का मीडिया सत्ता पक्ष से नहीं बल्कि विपक्ष से सवाल कर रहा है: जयशंकर गुप्ता

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया नई दिल्ली में प्रसिद्ध पत्रकार एवम कवि अतीक मुजफ्फरपुरी के 8वीं पुण्यतिथि के अवसर पर "वर्तमान प्रीस्तिथ में पत्रकारिता का दायित्व" पर एक संगोष्ठी आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रैस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य एवम वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर गुप्ता, विशिष्ट अतिथि प्रैस क्लब ऑफ इंडिया के अध्यक्ष उमाकांत लखेड़ा, ख़्वाजा इफ्तिखार अहमद, जसीम मुहम्मद चेयरमैन नरेंद्र मोदी अध्ययन केंद्र, कार्यक्रम की अध्यक्ष्ता पदमश्री प्रो. अख्तरुल वासे अथवा प्रोग्राम का संचालन वरिष्ठ कवि मोईन शादाब द्वारा किया गया।

नई दिल्ली: कुछ ऐसी घटनाओं की वजह से अन्य देशों में भारत की छवि को जो नुकसान पहुंचा है उसके लिए हमारे देश की हर पत्रकार को एक ही नजरिए से देखना उचित नहीं है क्योंकि अन्य पत्रकारों की तरह उर्दू पत्रकार अभी दो खेमों में नहीं बंटे हैं।

ये विचार प्रसिद्ध पत्रकार अतीक मुजफ्फर की, 8वीं पुण्यतिथि पर “वर्तमान परिस्थिति में पत्रकारिता की भूमिका” विषय पर सायबान फाउंडेशन (पंजीकृत) दिल्ली द्वारा आयोजित परिचर्चा में मौलाना आज़ाद विश्वविद्यालय, जोधपुर, राजस्थान के पूर्व अध्यक्ष ने व्यक्त किये। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में अतीक मुजफ्फरपुरी के 8वीं पुण्यतिथि कार्यक्रम में प्रोफेसर अख्तर उल वासे ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि भाषाओं के उत्थान और पतन के लिए सरकारें जिम्मेदार नहीं हैं बल्कि वे भाषा बोलने वाले हैं।

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य एवं कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि जयशंकर गुप्ता ने वर्तमान हालात पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज सच्चाई की आवाज को दबाया जा रहा है, आज की नकारात्मक पत्रकारिता नकारात्मक लोगों को हीरो बना रही है, टीवी चैनलों की स्थिति यह है कि वे सच नहीं दिखा रहे हैं और अफसोस की बात है कि आज का मीडिया सत्ता पक्ष से नहीं बल्कि विपक्ष से सवाल कर रहा है। उन्होंने कहा कि सच के साथ खड़ा होना ही आज सबसे सच्ची पत्रकारिता है। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एवं विशिष्ट अतिथि उमाकांत लखेड़ा ने संबंधित विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि देश को आजादी हर वर्ग के संयुक्त प्रयासों से मिली है और हमें प्रदत्त अधिकारों एवं शक्तियों का उपयोग करना चाहिए। सत्ता में चाहे किसी भी पार्टी की सरकार क्यों न हो। उन्हों ने कहा कि असंवैधानिक कार्रवाई का विरोध कानून के दायरे में रहकर किया जाना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि इंटरफेथ हार्मनी फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. ख्वाजा इफ्तिखार अहमद ने अतीक मुजफ्फर पुरी की शिक्षा पद्धति को याद करते हुए कहा कि मीडिया दिशा तय करने के साथ-साथ लोगों को सुधारने की भी ताकत रखता है। वर्तमान स्थिति की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि हमें कठिन परिस्थितियों में घबराना नहीं चाहिए, उन्होंने एक-दूसरे के साथ सहयोग और संबंधों की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि हमें हीन भावना से बाहर निकलना होगा, उन्होंने पत्रकारिता की वर्तमान स्थिति की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि अब पत्रकारिता नौकरी बन गई है।

जसीम मुहम्मद चैयरमैन नरेंद्र मोदी अध्ययन केंद्र ने कहा की आज पत्रकारिता के दौर में अतीक मुजफ्फरपुरी के विचारों को देखना बहुत मुश्किल है क्योंकी अब पत्रकारिता में ईमानदारी के इलावा सब कुछ देखने को मिलता है लेकीन अतीक मुजफ्फरपुरी का पूरा जीवन उनके द्वारा दिए गए कुर्बानी का ही नतीजा है की आज हम उन्हे 8 वर्ष देहांत के बाद उन्हें याद कर रहे हैं।

वरिष्ठ पत्रकार शोएब रजा फातमी ने अतीक मुजफ्फर पुरी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वह एक अच्छे इंसान और ईमानदार पत्रकार थे।

वरिष्ठ पत्रकार संजय जैन ने वर्तमान स्थिति और पत्रकारिता की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पत्रकारिता अपने मूल उद्देश्य और मिशन को छोड़कर दूसरी दिशा में चली गई है – परिस्थिति कोई भी हो, पत्रकारिता की भूमिका और संदेश सकारात्मक होना चाहिए।

जाने-माने पत्रकार अतीक मुजफ्फर पुरी के बड़े बेटे और सायबान फाउंडेशन के महासचिव एवम पत्रकार जावेद रहमानी ने कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों के प्रति आभार जताया और कहा कि स्वर्गीय अतीक मुजफ्फरपुरी जैसे सोच रखने वाले लोग सदियों में पैदा होते हैं और उनके कार्यों को रहती दुनियां तक याद किया जाता रहेगा।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे प्रसिद्ध कवि और पत्रकार मोईन शादाब ने कहा कि हर व्यक्ति को उसके काम के आधार पर याद किया जाता है। मरहूम अतीक मुजफ्फरपुरी अपने हरफनमौला काम के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता उन में उन की एक अलग पहचान थी।

कार्यक्रम में भाग लेने वालों में शफीकुल हसन, आकिब जावेद, मुश्ताक अंसारी, फिरोज सिद्दीकी, डॉ. मुख्तार आलम, असिस्टेंट प्रोफेसर, आईएएमआर विश्वविद्यालय, मेरठ, जावेद अख्तर वारसी, जसीम मुहम्मद, मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी ईमाम पार्लियामेंट मस्जिद नई दिल्ली, डॉ. मुहम्मद आदिल, अली आदिल खान, खावर हसन, खालिद रजा, इक़बाल खान, सईद अहमद, धर्मेंद्र शुक्ला, इमरान कलीम, मारूफ रजा,  रजिया शेख, अब्दुल मतीन, गुफरान अफरीदी ये नाम उल्लेखनीय हैं।