हिंदी विवि में ‘विकसित भारत@2047 की संकल्पना एवं एकात्म मानववाद’ विषय पर हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी
सुरक्षा, सम्मान और अवसरों की समानता से विकसित भारत की संकल्पना होगी साकार : डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे।
वर्धा: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 56वीं पुण्यतिथि के अवसर पर ‘विकसित भारत@2047 की संकल्पना एवं एकात्म मानववाद’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि राज्यसभा के पूर्व सदस्य डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने संबोधित करते हुए कहा कि एक नागरिक के नाते सुरक्षा, सम्मान और अवसरों की समानता प्राप्त होगी तभी भारत एक बनेगा और विकसित भारत की संकल्पना साकार होगी।
संगोष्ठी का आयोजन रविवार 11 फरवरी को ग़ालिब सभागार में कुलपति डॉ. भीमराय मेत्री के अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में वर्धा के सांसद रामदास तडस उपस्थित थे।
डॉ. सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि विकसित भारत और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन में एक स्वाभाविक संबंध है। भारत विकसित तभी होगा जब वह एक रहेगा। हम एक और एकात्म होंगे, श्रेष्ठता प्राप्त करेंगे तभी विकसित भारत का सपना सार्थक हो सकेगा। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक एकता हमारी वास्तविकता है। वैश्विक परिदृश्य में भारत की नई पहचान को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय दृष्टि से ही विश्व का समाधान हो सकेगा। उन्होंने स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी, लोकमान्य तिलक और डॉ. अम्बेडकर आदि के स्व-भाव, स्व-भाषा,स्व-भूषा के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी भाषा में शिक्षा ही विकास का महत्वपूर्ण बिंदु है। दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भाग्यशाली लोगों को अन्यों के प्रति संवेदना रखनी चाहिए, यही एकात्म मानववाद व विकसित भारत की पहली शर्त है।
वर्धा संसदीय क्षेत्र के सांसद रामदास तडस ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक राष्ट्रभक्त थे। उनके विचार दर्शन में राष्ट्र की चिंता सर्वप्रथम रही। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकास की अनेक योजनाओं के माध्यम से दीनदयाल उपाध्याय का सपना पूरा कर रहे हैं।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति डॉ. भीमराय मेत्री ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानववाद का वैज्ञानिक विवेचन किया था। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना व्यक्ति,समाज और परिवार में की जाती है। इस दिशा में भारत निरंतर अग्रसर हो रहा है। इस दौरान डॉ. कृष्ण चंद पाण्डेय द्वारा रामकृष्ण परमहंस की जीवनी पर आधारित ‘संभवामि युगे-युगे’ इन दो खण्डों में लिखित पुस्तकों का विमोचन मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया।
इस अवसर पर अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. कृष्ण कुमार सिंह ने प्रास्ताविकी की तथा वर्धा समाज कार्य संस्थान के निदेशक प्रो. बंशीधर पाण्डेय ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्ज्वलन, पंडित दीनदयाल उपाध्याय के फोटो पर पुष्पांजलि अर्पित कर तथा कुलगीत से किया गया। डॉ. जगदीश नारायण तिवारी ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. भदंत आनंद कौसल्यायन बौद्ध अध्ययन केंद्र के सहायक प्रोफेसर डॉ. कृष्ण चंद पाण्डेय ने किया तथा साहित्य विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. अखिलेश कुमार दुबे ने आभार माना। राष्ट्र गान के साथ उद्घाटन समारोह संपन्न हुआ।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. धरवेश कठेरिया, प्रो. फरहद मलिक, प्रो. अवधेश कुमार, प्रो. गोपाल कृष्ण ठाकुर, प्रो. हनुमान प्रसाद शुक्ल, डॉ. अशोक नाथ त्रिपाठी, डॉ. अनिल कुमार पाण्डेय, डॉ. रामानुज अस्थाना, डॉ. एच. ए. हुनगुंद, डॉ . राजेश लेहकपुरे, डॉ. रूपेश कुमार सिंह, डॉ. संदीप कुमार वर्मा, डॉ. रेणु सिंह, डॉ. गौरी शर्मा, डॉ. सारिका राय शर्मा, धर्मेंद्र शंभरकर, डॉ. रवि कुमार, डॉ. योगेन्द्र बाबू, डॉ. वागीश राज शुक्ल, डॉ. प्रमोद जोशी, डॉ. राजीव रंजन राय, डॉ. मुन्ना लाल गुप्ता, डॉ. प्रदीप , डॉ. हिमांशु शेखर, डॉ. आर पुष्पा नामदेव, डॉ. मनोज तिवारी, सन्मति जैन, आनंद भारती, बी. एस. मिरगे, डॉ. अमित कुमार विश्वास, डॉ. अंजनी राय, डॉ. गिरीश पाण्डेय, डॉ. राम अवध, डॉ. श्रीनिकेत मिश्र, डॉ. अश्विनी कुमार सिंह, कमल शर्मा, राजीव पाठक, तुषार वानखेड़े, शुभम सोनी, निलेश मुंजे, अटल पाण्डेय, मिथिलेश कुमार, हेमंत दुबे, हिमांशु नारायण आदि सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
उद्घाटन के बाद द्वितीय सत्र की अध्यक्षता करते हुए साहित्य विद्यापीठ के प्रो. अवधेश कुमार ने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय में कर्मठता और निर्भीकता है, उनके एकात्म मानववाद में बेहतर मनुष्य के निर्माण की चिंता है। हम एकात्म मानववाद से विकसित भारत की ओर बढ़ सकेंगे तथा समरस भारत का निर्माण हो सकेगा। इस अवसर पर पं. दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी के निदेशक प्रो.कृष्ण कुमार सिंह एवं महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय की डॉ. नीलम चोरे ने ऑनलाइन वक्तव्य दिया। डॉ. रामानुज अस्थाना ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कृष्ण चंद पाण्डेय ने किया तथा हिंदी साहित्य विभाग के एसोशिएट प्रोफेसर डॉ. अशोक नाथ त्रिपाठी ने आभार माना।
