केन्द्रीय विधिमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने नमो केंद्र द्वारा प्रकाशित मोदी के कार्यकाल की संवैधानिक यात्रा पर पुस्तक का विमोचन किया।

पुस्तक विमोचन समारोह में केंद्रीय मंत्री ने अनुच्छेद 35-ए को ‘पिछले दरवाजे से धोखाधड़ी’ बताया।

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केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल मोदी स्टडीज (नमो केंद्र) और प्रज्ञा संस्थान द्वारा विधिछात्र ऋषिराज सिंह और प्रिंस शुक्ला द्वारा लिखित पुस्तक “कांस्टीट्यूशनल जर्नी: एन ओवरव्यू फ्रॉम २०१४-२०२४” का विमोचन करते हुए साथ में रामबहादुर राय अथवा अन्य अतिथी देखे जा सकते हैं।

जर्नलिज्म टुडे संवाददाता 

नई दिल्ली: केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में सेंटर फॉर नरेंद्र मोदी स्टडीज (नमो केंद्र) और प्रज्ञा संस्थान द्वारा आयोजित कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के विधिछात्र ऋषिराज सिंह और प्रिंस शुक्ला द्वारा लिखित पुस्तक “कांस्टीट्यूशनल जर्नी: एन ओवरव्यू फ्रॉम २०१४-२०२४” का विमोचन किया।

प्रोफेसर एवं नरेंद्र मोदी अध्ययन केंद्र (नमो केंद्र) के अध्यक्ष प्रो. जसीम मोहम्मद केंद्रीय मंत्री को नमो थैला प्रस्तुत करते हुए।

सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान में अनुच्छेद 35-ए को अस्पष्ट रूप से शामिल किए जाने पर प्रकाश डाला और इसे ‘पिछले दरवाजे से धोखाधड़ी’ बताया। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 35-ए से संबंधित राष्ट्रपति के आदेश के बारे में संसद को अंधेरे में रखा गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के आदेश के बारे में संसद को जानकारी नहीं दी गई और इस अनुच्छेद के संबंध में संविधान में कोई औपचारिक संशोधन नहीं किया गया। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री ने पुस्तक “संविधान यात्रा: 2014-2024 का अवलोकन” में अनुच्छेद 35-ए की विस्तृत जांच के लिए लेखकों की सराहना की।

उन्होंने संविधान में इसे शामिल करने के तरीके पर टिप्पणी की और इसे पिछले दरवाजे से प्रवेश बताया। उन्होंने युवा लेखकों की उनके ज्ञानवर्धक कार्य के लिए प्रशंसा की और कहा कि उन्होंने अपनी पुस्तक के माध्यम से जनता की समझ को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अधिवक्ता परिषद के संगठन सचिव श्रीहरि बोरिकर ने ऋषिराज सिंह और प्रिंस शुक्ला के कार्य और देश की बौद्धिक विरासत में इसके योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने युवा लेखकों की समर्पण और उनके शोध की गहराई की सराहना की। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री गोविंद गोयल ने कहा कि लेखकों ने भारत के कानूनी विकास की पेचीदगियों को विस्तार से बताने में सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि कानूनी समुदाय के लिए ऐसी गहन पुस्तक को प्रकाश में आते देखना गर्व का क्षण है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन श्री मनन मिश्रा ने पुस्तक के महत्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कानूनी विमर्श को समृद्ध बनाने में ऐसे अकादमिक प्रयासों के महत्व पर प्रकाश डाला और संवैधानिक विकास के एक दशक पर स्पष्टता और कठोरता के साथ प्रकाश डालने के लिए लेखकों की प्रशंसा की।

अध्यक्षीय भाषण के दौरान, श्री राम बहादुर राय ने पुस्तक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “यह पुस्तक प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल का ट्रैक रिकॉर्ड है, जिसमें उनके नेतृत्व के दौरान महत्वपूर्ण विकास और सुधारों का दस्तावेजीकरण किया गया है।”

वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने लेखकों की उनके व्यावहारिक कार्य के लिए सराहना की और ऐसे विद्वत्तापूर्ण कार्यों को प्रकाशित करने की प्रतिबद्धता के लिए नरेंद्र मोदी अध्ययन केंद्र की सराहना की, जो राष्ट्र के शैक्षणिक और राजनीतिक विमर्श में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

प्रज्ञा संस्थान के सचिव राकेश सिंह ने सभी सम्मानित अतिथियों, गणमान्य व्यक्तियों और उपस्थित लोगों के प्रति उनकी उपस्थिति और योगदान के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया, जिससे पुस्तक विमोचन समारोह समृद्ध हुआ।

प्रोफेसर एवं नरेंद्र मोदी अध्ययन केंद्र (नमो केंद्र) के अध्यक्ष प्रो. जसीम मोहम्मद ने लेखकों के अनुकरणीय कार्य की सराहना की। उन्होंने युवा लेखकों की महत्वपूर्ण कृतियों को प्रकाशित करने के लिए संस्थान की उत्सुकता व्यक्त करते हुए कहा, “यदि ऐसा कोई विद्वत्तापूर्ण कार्य है, तो हम निश्चित रूप से उसे प्रकाशित करेंगे। हम प्रधानमंत्री मोदी की उपलब्धियों के बारे में जानकारी देने वाले विद्वत्तापूर्ण प्रयासों का समर्थन करने के लिए उत्सुक हैं”।

जसीम मोहम्मद कहा, “यदि ऐसा कोई सराहनीय कार्य है, तो नरेंद्र मोदी अध्ययन केंद्र उसे विधिवत क प्रकाशित करने का वचन देते हैं, बशर्ते वह राष्ट्रीय हित और शोधात्मक रूप में हो। कार्यक्रम का संचालन शेखर सुमन ने किया एवं सोशल मीडिया इंचार्ज आशुतोष सिंह और उनके टीम ने कार्यक्रम सफल बनाने में योगदान दिया। अतिथियों में मुख्यरूप से श्री प्रेम शुक्ल, प्रो दिव्या तंवर, अनिल माहेश्वरी, जावेद रहमानी, शिवओम, नदीम वारिस मौजुद थे।