‘तानाशाही नहीं चलेगी’, बांग्लादेश का PM बनने से पहले तारिक रहमान ने कट्टरपंथियों को दी सीधी चेतावनी
"हमारी राह अलग हो सकती है, लेकिन देश के हित में हमें एकजुट रहना होगा। राष्ट्रीय एकता हमारी ताकत है और विभाजन हमारी कमजोरी।" – तारिक रहमान
ढाका: बांग्लादेश में हुए 13वें आम चुनाव में BNP (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) की प्रचंड जीत के बाद तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय है। सत्ता संभालने से पहले ही रहमान ने कड़े तेवर दिखाते हुए देश के कट्टरपंथी तत्वों और अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि नई सरकार में अराजकता और तानाशाही के लिए कोई जगह नहीं होगी।

कट्टरपंथियों और उपद्रवियों को सख्त संदेश
चुनाव परिणामों के बाद अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस और जनसभाओं में तारिक रहमान ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर जोर दिया। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु:
‘बदला नहीं, बदलाव चाहिए’: रहमान ने समर्थकों से अपील की कि वे जीत के उत्साह में कानून को हाथ में न लें। उन्होंने कहा, “यह समय प्रतिशोध का नहीं, बल्कि देश के पुनर्निर्माण का है। किसी भी तरह की हिंसा या धार्मिक कट्टरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा: बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हुए हालिया हमलों के मद्देनजर, रहमान ने भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार सभी समुदायों के लिए एक सुरक्षित राष्ट्र बनाएगी।
तानाशाही का अंत: उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि शेख हसीना के शासन के बाद देश ने लोकतंत्र के लिए बड़ी कुर्बानी दी है, इसलिए अब किसी भी नई ‘छिपी हुई तानाशाही’ (Hidden Dictatorship) को पनपने नहीं दिया जाएगा।
भारत के साथ संबंधों पर क्या बोले?
तारिक रहमान ने भारत के साथ संबंधों पर एक संतुलित और व्यावहारिक (Pragmatic) दृष्टिकोण अपनाया है। उन्होंने कहा:
‘बांग्लादेश फर्स्ट’: उनकी विदेश नीति का आधार ‘बांग्लादेश का हित’ होगा।
समान सम्मान: उन्होंने भारत के साथ संबंधों में “पारस्परिक सम्मान और गैर-हस्तक्षेप” की बात कही।
पीएम मोदी की बधाई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तारिक रहमान को उनकी जीत पर बधाई दी है, जिसे दोनों देशों के बीच संबंधों के एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
एक नई शुरुआत की चुनौती
17 साल के निर्वासन के बाद लौटे तारिक रहमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और कट्टरपंथी गुटों (जैसे जमात-ए-इस्लामी) पर लगाम कसना है। उन्होंने युवाओं से वादा किया है कि वे एक ऐसा बांग्लादेश बनाएंगे जो “ज्ञान-आधारित” और “जवाबदेह” होगा।
