गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला: सोनम वांगचुक को हिरासत से मिली रिहाई।

लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद, केंद्र सरकार ने शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को रिहा करने का निर्णय लिया है।

केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रसिद्ध शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को तत्काल प्रभाव से रिहा करने का निर्णय लिया है। शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत प्राप्त अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए उनकी हिरासत रद्द कर दी है।
  सोनम वांगचुक को पिछले साल लद्दाख में हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद, 26 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था। अपनी हिरासत की निर्धारित अवधि का लगभग आधा समय वह पहले ही बिता चुके हैं।

लद्दाख की स्वायत्तता और अधिकारों को लेकर वांगचुक लंबे समय से संघर्षरत हैं:

  • मार्च 2024: लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने और 6वीं अनुसूची में शामिल करने के लिए 21 दिनों की भूख हड़ताल की।
  • अक्टूबर 2024: लद्दाख से दिल्ली तक पैदल मार्च निकाला, जिसके दौरान उन्हें दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर हिरासत में लिया गया था।
  • सितंबर 2025: उनकी 35 दिवसीय भूख हड़ताल के 15वें दिन (24 सितंबर) लेह में आंदोलन हिंसक हो गया, जिसमें 4 लोगों की जान गई और लगभग 50 लोग घायल हुए।

 

  सरकार का रुख और आधिकारिक बयान
  सरकार की ओर से जारी बयान में स्पष्ट किया गया है कि यह फैसला क्षेत्र में शांति और विश्वास का माहौल बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।

“सरकार लद्दाख के विभिन्न हितधारकों और सामाजिक नेताओं के साथ सक्रिय रूप से संवाद कर रही है ताकि उनकी चिंताओं का समाधान किया जा सके। क्षेत्र में स्थिरता और रचनात्मक चर्चा को बढ़ावा देने के लिए वांगचुक की हिरासत रद्द करने का निर्णय लिया गया है।”

गौरतलब है कि साल 2019 में अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग कर एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। शुरुआत में लद्दाख की जनता ने इस फैसले का स्वागत किया था, लेकिन बाद में पूर्ण राज्य के दर्जे और संवैधानिक सुरक्षा (6वीं अनुसूची) की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गए।

 

  सोनम वांगचुक: रेंचो की प्रेरणा?

  सोनम वांगचुक पहली बार व्यापक रूप से तब चर्चा में आए जब यह दावा किया गया कि ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘3 इडियट्स’ का मुख्य किरदार ‘रेंचो’ उनसे प्रेरित था। हालांकि, वांगचुक ने स्वयं एक इंटरव्यू में इस दावे को खारिज किया था, लेकिन वह देश के सबसे प्रभावशाली इंजीनियरों और इनोवेटर्स में से एक माने जाते हैं।