अमेरिका की वर्तमान रणनीति: ‘हमले पहले, सुरक्षा बाद में’ 

अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ जहाजों के साथ चलना (Escorting) काफी नहीं है।असली रणनीति ईरान के उन लॉन्च पैड्स और ड्रोन ठिकानों को नष्ट करने की है, जहाँ से जहाजों पर हमला हो सकता है।जब तक ये ठिकाने सक्रिय हैं, 'एस्कॉर्ट' का जोखिम बहुत ज्यादा बना रहेगा।

 

मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब पूरी दुनिया को प्रभावित कर रही है तनाव के कारण ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही ठप होने से दुनिया भर में तेल का संकट गहरा गया है। ईरान ने इस रणनीतिक मार्ग को बंद करने की धमकी दी है, जिसके जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी नौसेना के जरिए व्यापारिक जहाजों को ‘एस्कॉर्ट’ (सुरक्षा घेरे में निकालना) करने का भरोसा दिया है। हालांकि, ईरान के सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई ने इसे चुनौती देते हुए अमेरिकी ठिकानों पर हमले की चेतावनी दी है, जिससे युद्ध का खतरा बढ़ गया है।

तकनीकी रूप से, अमेरिका के पास जहाजों को एस्कॉर्ट करने की क्षमता तो है, लेकिन यह बेहद जोखिम भरा मिशन होगा। इसके लिए अमेरिकी नौसेना को ‘कॉन्वॉय सिस्टम’ अपनाना होगा, जिसमें तेल टैंकरों के चारों तरफ घातक युद्धपोत और ऊपर से फाइटर जेट्स का पहरा रहेगा। सबसे बड़ी चुनौती हॉर्मुज का संकरा रास्ता और ईरान के सुसाइड ड्रोन्स व एंटी-शिप मिसाइलें हैं, जो छिपकर हमला कर सकती हैं। इस मिशन को सफल बनाने के लिए अमेरिका को ईरान के तटीय मिसाइल अड्डों को पहले ही नष्ट करना पड़ सकता है, जो सीधे तौर पर एक बड़े वैश्विक युद्ध की शुरुआत हो सकती है।

 

होर्मुज जलडमरूमध्य के महत्व क्या है ?

 

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दुनिया की ‘तेल की जीवनरेखा’ कहा जाता है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला एक बेहद संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम व्यापार का लगभग 20% से 30% हिस्सा इसी छोटे से मार्ग से होकर गुजरता है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती इसकी बनावट है; यह अपने सबसे संकरे बिंदु पर मात्र 34 किलोमीटर चौड़ा है, और जहाजों के निकलने के लिए सुरक्षित रास्ता तो केवल 3 किलोमीटर का ही है।

इतनी कम जगह होने के कारण ईरान भौगोलिक रूप से बहुत मजबूत स्थिति में है। वह अपनी तटीय सीमा का फायदा उठाकर इस पूरे रास्ते और यहाँ से गुजरने वाले जहाजों को बड़ी आसानी से नियंत्रित कर सकता है। यही कारण है कि इस रास्ते पर मामूली सी हलचल भी पूरी दुनिया में तेल की कीमतों को प्रभावित कर देती है। 

 

क्या अमेरिका होर्मुज में जहाजों को एस्कॉर्ट कर सकता है?

 

इस सवाल का सीधा जवाब ‘हाँ’ है, क्योंकि सैन्य दृष्टि से अमेरिका के पास होर्मुज में जहाजों को एस्कॉर्ट करने की पूरी क्षमता मौजूद है। अमेरिकी नौसेना के बेड़े में ऐसे अत्याधुनिक डिस्ट्रॉयर्स (Destroyers) और युद्धपोत शामिल हैं, जो ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों को हवा में ही ढेर करने में सक्षम हैं। इसके अलावा, बहरीन में तैनात अमेरिका का ‘5वां बेड़ा’ (5th Fleet) विशेष रूप से मिडिल ईस्ट के समुद्री रास्तों की सुरक्षा और निगरानी के लिए ही बनाया गया है, जो किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई कर सकता है।

रणनीतिक और कानूनी तौर पर भी अमेरिका की स्थिति मजबूत है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत होर्मुज को एक ‘इंटरनेशनल स्ट्रेट’ माना गया है, जहाँ से दुनिया के किसी भी व्यापारिक जहाज को गुजरने का कानूनी अधिकार है। अमेरिका इस मिशन को अकेले अंजाम देने के बजाय ‘इंटरनेशनल मैरीटाइम सिक्योरिटी कंस्ट्रक्ट’ (IMSC) जैसे गठबंधन या ब्रिटेन, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया जैसे मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ मिलकर कर सकता है। सामूहिक सुरक्षा का यह तरीका न केवल सैन्य जोखिम को कम करता है, बल्कि ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बनाए रखता है।

 

कैसे एस्कॉर्ट करेगा अमेरिका?

अगर अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए ‘एस्कॉर्ट मिशन’ शुरू करता है, तो यह एक बहुस्तरीय और बेहद आक्रामक सैन्य रणनीति होगी। इसका सबसे पहला और बुनियादी कदम समुद्री गतिविधियों को बढ़ाना होगा, जिसके तहत तेल टैंकरों और कार्गो जहाजों के बड़े काफिले (Convoy) बनाए जाएंगे। इन काफिलों की सुरक्षा का जिम्मा अमेरिकी नौसेना के उन एडवांस वॉरशिप्स और डिस्ट्रॉयर्स पर होगा, जो दुश्मन की मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने में सक्षम हैं।

इस मिशन की सफलता के लिए केवल समुद्र ही नहीं, बल्कि आसमान से भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी। अमेरिकी नौसेना अपने टोही विमानों (Surveillance Aircraft) और ड्रोन्स को 24 घंटे एक्टिव रखेगी, ताकि जलमार्ग की हर हलचल पर नजर रखी जा सके। किसी भी आपात स्थिति या ईरान की ओर से हमले की कोशिश होने पर, पास में तैनात अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर (Aircraft Carrier) और क्षेत्रीय सैन्य अड्डों से फाइटर जेट्स को ‘स्टैंडबाय’ पर रखा जाएगा, जो चंद मिनटों में जवाबी कार्रवाई कर सकें। यह पूरी प्रक्रिया तकनीक और सैन्य ताकत का एक ऐसा तालमेल होगा, जिसका उद्देश्य ईरान के किसी भी दुस्साहस को नाकाम करना है।

ईरान को हल्के में नहीं ले सकता अमेरिका

 

भले ही अमेरिका के पास विशाल सैन्य शक्ति है, लेकिन हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की चुनौती को नजरअंदाज करना एक बड़ी भूल साबित हो सकती है। दशकों से इस क्षेत्र पर मजबूत पकड़ रखने वाली ईरानी सेना ने यहाँ ‘असममित युद्ध’ (Asymmetric Warfare) की एक ऐसी दीवार खड़ी की है, जिसे भेदना किसी भी आधुनिक नौसेना के लिए कठिन है। ईरान के पास छोटी, तेज रफ्तार और घातक नावों का एक विशाल बेड़ा है, जो मशीनगनों और रॉकेटों से लैस होकर ‘झुंड’ (Swarm) के रूप में हमला करने में माहिर हैं। संकरे रास्ते में इन फुर्तीली नावों को ट्रैक करना और रोकना बड़े युद्धपोतों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होता है।

इसके अलावा, हॉर्मुज की भौगोलिक स्थिति ईरान को एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच प्रदान करती है। ईरान ने अपने तटीय पहाड़ों और समुद्री किनारों पर अत्याधुनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों का जाल बिछा रखा है। चूंकि यह जलमार्ग अपने सबसे संकरे बिंदु पर बहुत छोटा है, इसलिए वहां से गुजरने वाले किसी भी जहाज के पास ईरानी मिसाइल हमले की स्थिति में बचाव या प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय (Response Time) बचता है। यह संकरापन अमेरिकी तकनीक के लिए एक बड़ा सिरदर्द है, क्योंकि यहाँ ताकत से ज्यादा भूगोल ईरान के पक्ष में खड़ा नजर आता है।