होर्मुज विवाद: अमेरिका ने ठुकराई ईरान की शर्त, विदेश मंत्री का दोटूक जवाब- “समझौता नामुमकिन।”

होर्मुज संकट: ईरान ने अमेरिका के सामने रखा ‘शांति प्रस्ताव’, क्या नाकाबंदी हटने पर थमेगा युद्ध?

वॉशिंगटन/तेहरान | पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने कूटनीतिक मोर्चे पर एक बड़ा दांव चला है। ईरान ने अमेरिका को एक नया प्रस्ताव दिया है, जिसमें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को खोलने और युद्ध रोकने की बात कही गई है। हालांकि, इस प्रस्ताव के साथ जुड़ी शर्तों ने वॉशिंगटन में हलचल तेज कर दी है।

ईरान का नया प्रस्ताव: क्या हैं शर्तें?

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के रूस दौरे के दौरान सामने आए इस प्रस्ताव के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • नाकाबंदी की समाप्ति: ईरान का कहना है कि यदि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की आर्थिक और सैन्य नाकाबंदी खत्म कर देता है, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खोलने और युद्ध को विराम देने के लिए तैयार है।

  • परमाणु मुद्दे पर देरी: ईरान ने प्रस्ताव दिया है कि सबसे विवादास्पद ‘परमाणु सुरक्षा’ के मुद्दे पर फिलहाल चर्चा टाल दी जाए और इस पर बाद में बात की जा सकती है।

अमेरिका का रुख: “प्रस्ताव बेहतर, पर परमाणु मुद्दे पर समझौता नहीं”

व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नेशनल सिक्योरिटी टीम इस ‘ऑफर’ पर विचार-विमर्श कर रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

रूबियो ने माना कि यह प्रस्ताव उम्मीद से बेहतर नजर आ रहा है, लेकिन उन्होंने साफ़ किया कि परमाणु मुद्दे को नजरअंदाज करना नामुमकिन है। उन्होंने जोर देकर कहा:

“ईरान के साथ कोई भी भविष्य का समझौता ऐसा होना चाहिए जो उसे परमाणु हथियार बनाने से निश्चित रूप से रोके। हमें इस बात में जरा भी संदेह नहीं है कि मौका मिलने पर मौजूदा ईरानी शासन परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश करेगा।”

कूटनीतिक चाल या गंभीर पहल?

ईरान की गंभीरता पर सवाल उठाते हुए रूबियो ने चेतावनी दी कि ईरान के वार्ताकार ‘शातिर’ हैं और मुमकिन है कि वे केवल वक्त हासिल करने के लिए यह पेशकश कर रहे हों। अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी ऐसी डील के पक्ष में नहीं है जिसमें ईरान को परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की छूट मिले।

रूस की भूमिका पर सस्पेंस

यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब ईरानी विदेश मंत्री रूस में थे। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस नए कूटनीतिक फॉर्मूले के पीछे मॉस्को की कोई भूमिका है या नहीं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय गलियारों में इसे ईरान की ओर से दबाव कम करने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।


आगे क्या होगा?

अब पूरी दुनिया की नजरें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। क्या अमेरिका आर्थिक नाकाबंदी हटाकर व्यापारिक मार्ग (होर्मुज) को सुरक्षित करने का जोखिम उठाएगा, या फिर परमाणु सुरक्षा की अपनी मांग पर अड़ा रहेगा? आने वाले कुछ दिन वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।