क्या साबिया सैफी को इंसाफ़ नही मिलेगा? हर व्यक्ती को धर्म जाति से ऊपर उठकर बेटी को इंसाफ़ दिलाना हैं-शाहिद अफरीदी

किशनगंज(मोहम्मद अजीमुद्दीन)-क्या साबिया निर्भया होती तभी लोग इंसाफ के लिए सड़क पर आकर प्रदर्शन करते बेटियों की हत्या और बलात्कार के लिए केन्द्र और रियासत सरकार दोनो जिम्मेदार हैं क्या हिंदुस्तान में नारी सम्मान व बेटियों के लिए सुरक्षित व्यवस्था कानून नहीं लागू हों सकता आए दिन हत्या बलात्कार की घटना टीवी चैनलो द्वारा व अखबार के माध्यम से सुनते रहते हैं कब तक बेटी व नारी इस जुल्म का शिकार बनते रहे अमूमन तौर पर देखा जाएं तो दो वर्ग के विशेष समुदाय हि अधिकतर संख्या में शिकार होते रहे हैं दलित की बेटीया व महिलाए और दूसरा मुस्लिम समुदाय की बेटियां और महिलाएं NCRB की रिपोर्ट खंगालने पर दलित और मुस्लिम समुदाय हि अधिकतर संख्या में हत्या व बलात्कार का शिकार हुए है आखिरकार कब तक महिलाए और बेटियां इन दरिंदो का शिकार बनते रहे दिल्ली की घटना इन दिनों में एक सप्ताह में दो बेटियों की जान चली गईं जब पुलिस में रहकर save नहीं हैं तो हमारी बहन बेटियां अब किनसे इंसाफ मांगे
21 वर्षीय साबिया सैफी दिल्ली पुलिस डिफेंस की नौकरी करते हुए अभी उसे 4 महीने ही हुए थे कि उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गयी। 27 अगस्त की शाम साबिया सैफी दिल्ली के संगम विहार स्थित अपने घर नहीं लौटने पर परेशान हाल घरवालों ने उसे हर जगह ढूंढा थाने गए कलेक्टर के यहाँ गए लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली फिर पता चला साबिया की हत्या हो चुकी है वो भी बहुत ही बर्बरता के साथ इतनी बर्बरता से की रूह कांप जाए साबिया के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ 4-4 दरिंदों ने उसके साथ सामुहिक दुष्कर्म किया तकरीबन 50 जगह चाकू घोंप दिए स्तन काट दिए गए हैवानियत की सारी हदें पार कर दी गई वहीँ इस पूरी हैवानियत में उसके साथ काम करने वाली एक लड़की का नाम भी आ रहा है सरकारें और पुलिस पूरे मामले को दबाने और केस का रुख मोड़ने की कोशिश में लगी है सबसे शर्मनाक मामला तो ये है कि इस पूरे मामले में विपक्ष भी खामोशी बरते हुए है ऐसा लगता है कि भाजपा ने बेटियों के बलात्कार और हत्या का ठेका दरिंदों को दे दिया है हम वर्त्तमान सरकार और विपक्ष से पूछना चाहते हैं कि क्या अगर ये सबिया की जगह निर्भया होती तब भी आप इसी तरह खामोश तमाशा देख रहे होते शर्म आती है अब हम बेटियों में भी जात पात देखने लगे हैं हमें अभी भी उम्मीद है देश की जनता अपनी बेटियों के लिए सड़कों पर जरूर उतरेगी और इन्साफ की आवाज बुलंद की जाएगी ।
