46 बीघा जमीन पर नगर निगम की कार्रवाई, एएमयू ने बताया अपनी कानूनी संपत्ति।
अलीगढ़ में गुरुवार को नगर निगम और जिला प्रशासन ने भमोला माफी के नगला पटवारी क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए करीब 3.863 हेक्टेयर यानी लगभग 46 बीघा जमीन को अपने कब्जे में ले लिया। नगर निगम के अनुसार इस बेशकीमती जमीन की अनुमानित कीमत 500 करोड़ रुपये से अधिक है। यह जमीन अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के राइडिंग फील्ड से संबंधित बताई जा रही है।
अलीगढ़: (मोहम्मद कामरान ) अलीगढ़ में गुरुवार को नगर निगम और जिला प्रशासन ने भमोला माफी के नगला पटवारी क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए करीब 3.863 हेक्टेयर यानी लगभग 46 बीघा जमीन को अपने कब्जे में ले लिया। नगर निगम के अनुसार इस बेशकीमती जमीन की अनुमानित कीमत 500 करोड़ रुपये से अधिक है। यह जमीन अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के राइडिंग फील्ड से संबंधित बताई जा रही है।
नगर निगम की कार्रवाई के बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए अपने अधिकारियों के साथ मौके का निरीक्षण किया और नगर निगम की कार्रवाई को गलत और गैरकानूनी बताया। यूनिवर्सिटी ने जमीन पर अपने कानूनी मालिकाना हक का दावा करते हुए कहा कि उसके पास जमीन से संबंधित सभी दस्तावेज और कानूनी साक्ष्य मौजूद हैं।
नगर निगम ने जमीन की पैमाइश कराकर कराई फेंसिंग
विवरण के मुताबिक नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा की मौजूदगी में नगर निगम, राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने जमीन की पैमाइश कराई। पैमाइश के बाद जमीन के चारों तरफ तारों की फेंसिंग कराई गई और नगर निगम की संपत्ति के बोर्ड लगाए गए। अधिकारियों के मुताबिक राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन ऊसर और बंजर के रूप में दर्ज है।
नगर आयुक्त ने बताया कि 3.863 हेक्टेयर जमीन 10 गाटा संख्याओं में स्थित है। राजस्व टीम द्वारा इस जमीन की पैमाइश 7 अप्रैल 2025 को की जा चुकी थी, जबकि 16 अप्रैल 2025 को एसडीएम कोल की ओर से आगे की कार्रवाई के लिए नगर निगम को पत्र भेजा गया था।
नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक जमीन पूर्व में एएमयू के कब्जे में थी, हालांकि मौके पर यूनिवर्सिटी की ओर से कोई निर्माण नहीं मिला। कार्रवाई के बाद नगर निगम ने जमीन को अपनी निगरानी में लेकर सुरक्षित कर लिया है।
नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप इस बेशकीमती जमीन का इस्तेमाल जनहित और शहरहित की परियोजनाओं के लिए किया जाएगा। उन्होंने बताया कि भविष्य में यहां पुलिस थाना, बच्चों का स्कूल, इंटर कॉलेज, अस्पताल और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स जैसी परियोजनाओं पर विचार किया जा सकता है।
एएमयू का दावा, जमीन यूनिवर्सिटी की कानूनी संपत्ति
दूसरी ओर एएमयू प्रशासन ने नगर निगम की कार्रवाई को खारिज करते हुए कहा कि राइडिंग फील्ड की संबंधित जमीन यूनिवर्सिटी की कानूनी संपत्ति है। यूनिवर्सिटी के अनुसार जमीन से संबंधित सभी दस्तावेज, रिकॉर्ड और कानूनी साक्ष्य उसके पास मौजूद हैं।
एएमयू ने अपने बयान में कहा कि 13 जून 1925 से यह जमीन अधिग्रहण भूमि कानून-1894 के तहत यूनिवर्सिटी की देखरेख में है। यूनिवर्सिटी के अनुसार 19 नवंबर 1940 को यूनाइटेड प्रोविंस के गवर्नर ने यह जमीन अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के लिए अधिग्रहित की थी।
यूनिवर्सिटी ने कहा कि एएमयू केंद्र सरकार के अधीन एक स्वायत्त शैक्षणिक संस्थान है और उसकी संपत्तियां केंद्र सरकार के अधीन आती हैं। ऐसे में नगर निगम की ओर से जमीन को कब्जामुक्त कराने का दावा सही नहीं है।
एएमयू प्रशासन ने आरोप लगाया कि वर्ष 1992 में यूनिवर्सिटी के राजस्व रिकॉर्ड में कथित तौर पर गुप्त तरीके से बदलाव किया गया था। यूनिवर्सिटी के अनुसार इस बदलाव के लिए किसी सक्षम अधिकारी के आदेश या अनुमति का उल्लेख नहीं है। वर्ष 2003 में इसकी जानकारी मिलने के बाद से राजस्व रिकॉर्ड में सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
यूनिवर्सिटी ने बताया कि 29 मार्च 2025 को राजस्व रिकॉर्ड में सुधार के लिए कानूनी रूप से अपना दावा प्रस्तुत किया गया था, जो फिलहाल एसडीएम कोल के यहां विचाराधीन है। एएमयू ने सवाल उठाया कि जब मामला लंबित है तो इसी दौरान नगर निगम की ओर से जमीन पर कार्रवाई किस कानूनी आधार पर की गई।
यूनिवर्सिटी के मुताबिक 3 जनवरी 2022 को हुई पैमाइश के बाद 6 जनवरी 2022 को तहसीलदार, कानूनगो और लेखपाल की संयुक्त रिपोर्ट में भी यह जमीन अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के घुड़सवार फील्ड के नाम पर दर्ज की गई थी।
वीसी ने अधिकारियों के साथ मौके का निरीक्षण किया
एएमयू की कुलपति प्रोफेसर नईमा खातून ने मामले को गंभीरता से लेते हुए यूनिवर्सिटी के अन्य अधिकारियों के साथ मौके का निरीक्षण किया। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा है कि अपनी संपत्तियों और रिकॉर्ड की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
एएमयू के अनुसार मामले की जानकारी मिलते ही प्रॉक्टर प्रोफेसर मोहम्मद नावेद खान अपनी टीम, मेंबर इंचार्ज प्रॉपर्टी प्रोफेसर मोहम्मद आसिफ और प्रॉपर्टी ऑफिसर मोहम्मद आरिफ अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और नगर निगम की कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए यूनिवर्सिटी का पक्ष रखा। इसके बाद यूनिवर्सिटी अधिकारियों ने नगर आयुक्त और एसडीएम कोल से मुलाकात कर भी अपना पक्ष सामने रखा।
इस दौरान AMUTA के अध्यक्ष प्रोफेसर तुफैल अहमद और सचिव अशरफ मतीन भी यूनिवर्सिटी अधिकारियों के साथ मौजूद रहे।
एसडीएम ने राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर जमीन को सरकारी बताया
वहीं, एसडीएम कोल डॉ. गजेन्द्र पाल सिंह ने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में उक्त जमीन ऊसर और बंजर के रूप में दर्ज है और स्वामित्व संबंधी रिकॉर्ड के आधार पर इसे सरकारी जमीन माना गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जमीन पर दोबारा कब्जे या उससे छेड़छाड़ की कोशिश की गई तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कार्रवाई के दौरान एसडीएम कोल गजेन्द्र पाल सिंह, सहायक नगर आयुक्त तपस्या यादव, एसीएम-2 परितोष मिश्रा, सीओ सर्वम सिंह, संपत्ति विभाग, प्रवर्तन दल, पुलिस और निर्माण विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
नगर निगम की कार्रवाई और एएमयू के मालिकाना
हक के दावे के बाद अब जमीन के राजस्व रिकॉर्ड और कानूनी स्वामित्व को लेकर विवाद सामने आ गया है। मामला एसडीएम कोल के यहां विचाराधीन होने के चलते अब आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।
