18वें अंतर्राष्ट्रीय सूफ़ी रंग महोत्सव 2026 का भव्य उद्घाटन — पहले ही दिन 50,000 से अधिक अक़ीदतमंदों की हाज़िरी।
ऐतिहासिक महफ़िल खाना में 43 देशी-विदेशी कलाकारों का संगम; कैलिग्राफी, दुर्लभ क़ुरआन शरीफ़ और महफ़िल-ए-समा के साथ पाँच दिवसीय आयोजन का आग़ाज़।
अजमेर, राजस्थान: ऐतिहासिक महफ़िल खाना, दरगाह हज़रत ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती (र.अ.) में 18वें अंतर्राष्ट्रीय सूफ़ी रंग महोत्सव 2026 का भव्य उद्घाटन गहरी रूहानी कैफ़ियत के साथ संपन्न हुआ, जिसमें पहले ही दिन देश-विदेश से 50,000 से अधिक अक़ीदतमंदों ने शिरकत की — जो इस महोत्सव के अठारह वर्षीय सफ़र में सबसे बड़े जनसमूहों में से एक है।
महोत्सव में 43 देश-विदेश के विख्यात कलाकार भाग ले रहे हैं, जिसका नेतृत्व चिश्ती फाउंडेशन के चेयरमैन हाजी सैयद सलमान चिश्ती, फ़ेस्टिवल डायरेक्टर डॉ. अज़ीम एस. मेमन, फ़ेस्टिवल एडवाइज़र एम्बेसडर डॉ. फहीम एफ. खान एवं कोऑर्डिनेटर उस्ताद महमूद शेख ने किया। उद्घाटन समारोह की गरिमामय निज़ामत और पवित्र क़ुरआन की क़िरात सैयद फ़ुज़ैल चिश्ती द्वारा संपन्न की गई, जिसके उपरांत अंजुमन-ए-ख़ुद्दाम-ए-ख़्वाजा के सचिव सैयद कलीमुद्दीन चिश्ती साहब ने अपनी दुआओं और आशीर्वचनों से नवाज़ते हुए आयोजन की सराहना की। हैदराबाद से आए जनाब अनिल चौहान ने रूहानी अंदाज़ में ना’त-ए-रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पेश की — जो ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ की दरगाह की उस साझी विरासत का जीवंत प्रमाण है जिसे आठ सदियों से सहेजा जा रहा है।
राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद (NCPUL), नई दिल्ली के प्रोजेक्ट असिस्टेंट मोहम्मद कासिम ने आज की पीढ़ी के लिए कैलिग्राफी और उर्दू भाषा के महत्व पर सारगर्भित विचार रखे। चेयरमैन हाजी सैयद सलमान चिश्ती द्वारा सभी आगंतुक अतिथियों, विद्वानों एवं कलाकारों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करने के पश्चात इंदौर के जनाब आफ़ताब क़ादरी ने महफ़िल-ए-समा में सूफ़ी कलाम से समां बांध दिया।
इस अवसर पर हाजी सैयद सलमान चिश्ती, गद्दी नशीन दरगाह अजमेर शरीफ़ एवं चेयरमैन चिश्ती फाउंडेशन ने कहा:
“सूफ़ी रंग कोई प्रस्तुति नहीं — यह रंगों, रेखाओं, हुरूफ़ और सुरों में अदा की गई एक दुआ है। जब एक ही दिन पचास हज़ार तलबगार दिल ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ के आँगन में क़दम रखते हैं, तो वे दर्शक बनकर नहीं आते — वे एक ही राह के मुसाफ़िर बनकर आते हैं। कैलिग्राफर की क़लम का हर नक़्श और समा का हर सुर वही पैग़ाम लिए है जो अजमेर शरीफ़ 800 वर्षों से दुनिया को दे रहा है — सबके लिए मोहब्बत, किसी के लिए द्वेष नहीं।”
इन रूहानी नज़रानों के साथ-साथ महोत्सव में दो दुर्लभ क़ुरआन शरीफ़ के विशेष दीदार का प्रबंध किया गया है — एक आब-ए-ज़मज़म, गोंद और केसर के प्राकृतिक मिश्रण से लिखित, और दूसरा पूर्णतः हाथ से सिला हुआ (हैंड-स्टिच्ड) — जबकि लाइव कैलिग्राफी वर्कशॉप और लाइव कालीन आर्ट पेंटिंग का सजीव प्रदर्शन उद्घाटन दिवस पर आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रहा।
18वाँ अंतर्राष्ट्रीय सूफ़ी रंग महोत्सव 2026 दरगाह अजमेर शरीफ़ में 26 अगस्त 2026 तक जारी रहेगा, जिसमें प्रतिदिन कैलिग्राफी सत्र, कलाकार प्रदर्शनियाँ, दुर्लभ पांडुलिपियों के दीदार और संध्याकालीन महफ़िल-ए-समा सभी आगंतुकों के लिए — बिना किसी धर्म, राष्ट्रीयता या भेदभाव के — खुले रहेंगे।
