माँ, मातृभूमि एवम मातृभाषा आराध्य है :- प्रो. अकील अहमद
नई दिल्ली: राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद, नई दिल्ली में “भारत के एक क्रान्तिकारी एवं स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी हेमू कालाणी जी के शहीदी दिवस” के अवसर पर आज दिनांक 21 जनवरी 2022 को परिषद के सम्मेलन कक्ष में शहीदी दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर परिषद द्वारा सिंधी विशेषज्ञों/ वक्ता श्री हीरो ठकुर जी, श्रीमति नीतू मटाई व श्री महेश छाबरिया जी, को अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया।
इस अवसर पर परिषद के निदेशक प्रो. अकील अहमद जी ने, “भारत के एक क्रान्तिकारी एवं स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी हेमू कालाणी जी के शहीदी दिवस के अवसर पर श्रद्धांजलि देते हुए स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी हेमू कालाणी जी के बारे में संक्षिप्त व्याख्यान प्रस्ततु करते हुए यह कहा कि स्वंत्रता संग्राम में भारत माता के अनगिनत सपूतो ने अपने प्राणों की आहुति देकर भारत माता को गुलामी की जंजीरों से आजाद कराया। आजादी की लड़ाई में भारत में सभी प्रदेशो का योगदान रहा। अंग्रेजो को भारत से भगा कर देश को जिन वन्दनीय वीरो ने आजाद कराया उनमे सबसे कम उम्र के बालक क्रांतिकारी अमर शहीद हेमू कालाणी को भारत देश कभी नही भुल पायेगा। स्वतन्त्रता सेनानी हेमू कालाणी जी साथियों के साथ विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया और लोगों से स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करने का आग्रह किया। सिन्ध के सपूत अमर शहीद हेमू कालाणी के 79वें शहादत दिवस श्रद्धासुमन अर्पित करतें हुए यह संदेश दिया कि अगर हिन्दुस्तान को विश्व गुरु बनते हुए देखना है तो हम सब को यह ज्ञात होना चाहिए कि जैसे ईश्वर आराध्य है उसी तरह माँ, मातृभूमि एवम मातृभाषा भी आराध्य है।
सिंधी वक्ताओं द्वारा यह संदेश दिया गया की 1942 में 19 वर्षीय किशोर क्रांतिकारी ने “अंग्रेजो भारत छोड़ो” नारे के साथ अपनी टोली के साथ सिंध प्रदेश में तहलका मचा दिया था और उसके उत्साह को देखकर प्रत्येक सिंधवासी भी जोश में आ गये थे। हेमू कालाणी समस्त विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने के लिए लोगों से अनुरोध किया करते थे। शीघ्र ही सक्रिय क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल होकर उन्होंने हुकुमत को उखाड़ फेंकने के संकल्प के साथ राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रियाकलापों में भाग लेना शुरू कर दिया। अत्याचारी फिरंगी सरकार के खिलाफ छापामार गतिविधियों एवं उनके वाहनों को जलाने में हेमू सदा अपने साथियों का नेतृत्व करते थे I 21 जनवरी 1943 को उन्हें फांसी की सजा दे दी गई। फांसी से पहले जब उनसे आखरी इच्छा पूछी गई तो उन्होंने भारतवर्ष में फिर से जन्म लेने की इच्छा जाहिर की। इन्कलाब जिंदाबाद और भारत माता की जय की घोषणा के साथ उन्होंने फांसी को सहर्ष स्वीकार किया।
व्यख्यान का समापन करते हुए राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद के निदेशक ने सिन्ध के सपूत अमर शहीद हेमू कालाणी के 79वें शहादत दिवस पर श्रद्धासुमन के फूल अर्पित किये तथा राष्ट्रीय गान के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया ।
इस अवसर पर परिषद के निदेशक प्रो. अकील अहमद, अतिथिगण हरी ठकुर, महेश छाबरिया, नीतू मटाई व अनीता शिवनानी एवं परिषद के समस्त अधिकारी एव कर्मचारी गण उपस्थित रहें।
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