कानपुर वकील प्रियांशु मौत मामला: परिजनों ने बयां की आखिरी पलों की कहानी, लगाए गंभीर आरोप।
कानपुर: 23 वर्षीय वकील प्रियांशु की मौत के पीछे का सच क्या? सुसाइड नोट और परिवार के दावों के बीच उलझी गुत्थी
कानपुर | उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में एक युवा वकील की मौत ने सबको झकझोर कर रख दिया है। 23 वर्षीय प्रियांशु श्रीवास्तव ने 23 अप्रैल को कचहरी परिसर में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। इस मामले में पुलिस को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया एक दो पन्नों का सुसाइड नोट मिला है, जिसने परिवार और समाज के बीच की कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है।
सुसाइड नोट: बचपन की कड़वाहट और ‘मानसिक टॉर्चर’ का आरोप
पुलिस के मुताबिक, प्रियांशु ने अपनी मौत से पहले सोशल मीडिया पर एक विस्तृत नोट साझा किया था। इसमें उन्होंने अपने पिता पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
आरोप: प्रियांशु ने बचपन की कुछ कड़वी यादों का ज़िक्र करते हुए पिता पर ‘मानसिक प्रताड़ना’ (Mental Torture) और ज़रूरत से ज़्यादा सख़्ती बरतने का आरोप लगाया।
पुलिस की कार्रवाई: डीसीपी ईस्ट सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि उन्हें घटना का सीसीटीवी फुटेज मिला है, जिसमें प्रियांशु फोन पर बात करते दिख रहे हैं। सुसाइड नोट की सत्यता की जांच की जा रही है।
पिता का पक्ष: “हम तो बस उसकी सुरक्षा चाहते थे”
प्रियांशु के पिता, राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव, जो खुद एक वकील हैं, इन आरोपों से पूरी तरह इनकार करते हैं। उनका कहना है कि उनकी सख़्ती केवल बेटे की सुरक्षा के लिए थी।
“हम लोग हमेशा उसकी बहुत केयर करते थे। वह दोस्तों के साथ बाहर जाने की बात करता तो हम मना कर देते थे क्योंकि सड़क पर भीड़ होती थी। अगर वह रात 8 बजे कहीं जाता, तो हम पूछते थे कि किसके साथ जा रहे हो? हमें उसकी फिक्र रहती थी।”
घटना वाले दिन का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया कि पर्दे को लेकर हुई एक मामूली बहस के बाद उन्होंने प्रियांशु को ‘संस्कारों’ की याद दिलाते हुए डांटा था, जिसे शायद प्रियांशु ने दिल से लगा लिया।
बहन का दावा: काम का बोझ और तनाव
प्रियांशु की बहन गरिमा श्रीवास्तव ने एक अलग पहलू सामने रखा है। उनके अनुसार, प्रियांशु पर काम का बहुत दबाव था।
वित्तीय तनाव: गरिमा ने बताया कि प्रियांशु के कई पुराने काम पेंडिंग थे। उसने लोगों का करीब डेढ़ लाख का काम किया था, लेकिन उसे पैसे नहीं मिल पा रहे थे, जिससे वह तनाव में था।
भावुक स्वभाव: “भैया बहुत अच्छे थे, लेकिन उनका व्यवहार पल-पल बदलता था। घटना वाले दिन वह बहुत परेशान थे और रो रहे थे।”
विशेषज्ञ की राय: क्या कहती है मनोविज्ञान की दुनिया?
इस मामले पर मनोवैज्ञानिक प्रोफ़ेसर आरसी त्रिपाठी का मानना है कि इसे केवल बचपन की एक घटना से जोड़ना गलत होगा।
सम्मान की कमी: प्रो. त्रिपाठी के अनुसार, भारतीय समाज में जब माता-पिता और बच्चों का संबंध टूटता है, तो व्यक्ति पूरी तरह बिखर जाता है। प्रियांशु को शायद यह लगा कि उसे वह सम्मान नहीं मिल रहा है जिसका वह हकदार था।
सलाह: विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता को अपने बच्चों को एक स्वतंत्र ‘इंडिविजुअल’ के रूप में देखना चाहिए। उनके विचार और जीवन जीने का तरीका अलग हो सकता है, जिसे स्वीकार करना ज़रूरी है।
वर्तमान स्थिति
पुलिस ने मामले को ‘प्रथमदृष्टया आत्महत्या’ माना है। हालांकि, अभी तक परिवार की ओर से कोई औपचारिक शिकायत (तहरीर) दर्ज नहीं कराई गई है। मामले की जांच जारी है कि क्या यह कदम केवल पारिवारिक कलह का नतीजा था या इसके पीछे कोई गहरा मनोवैज्ञानिक दबाव था।
हेल्पलाइन: यदि आप या आपका कोई परिचित तनाव में है, तो कृपया मदद मांगें। आप जीवन (044-24640050) या अन्य स्थानीय मेंटल हेल्थ हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं।
