राहत इंदौरी हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे

मशहूर शायर स्वर्गीय डॉक्टर राहत इंदौरी की पहली पुण्यतिथि पर पूरे देश में उन्हें याद किया गया।

एम. एस. हसन, वरिष्ठ पत्रकार
भोपाल : अपनी शायरी के अनोखे अंदाज़े बयां से दुनिया भर में मशहूर विश्वविख्यात शायर राहत इंदौरी साहब को कल 11 अगस्त को उनकी पहली पुण्यतिथि पर “आशिकाने राहत इंदौरी” ने एक शानदार महफ़िल का आयोजन कर मरहूम को याद किया। पहली पुण्यतिथि पर आयोजित महफ़िल, राहत “ यादें और बातें “ शीर्षक से शुरू हुईं जिसमें हिन्दुस्तान के कई विख्यात (मशहूर) शायरों ने शिरकत की जिनमें अंतरराष्ट्रीय शायर और भोपाल की शान मंजर भोपाली भी शामिल थे।

राहत के लिए आयोजित कार्यक्रम में शायरों ने कहा “ उनसा नहीं देखा” तो कई ने कहा “ तुम बहुत याद आए” यही नहीं और न जाने कितने मधुर शब्दों से राहत साहब को सम्मानित किया गया। कई शायरों ने तो यहाँ तक कहा कि उनकी बेबाक़ और निडर शायरी की कोई मिसाल नही । बात कहां से शुरू की जाए, ये सोचना पड़ेगा… क्योंकि याद राहत इंदौरी को करना है। उनकी शायरी के लिए कुछ कहा जाए, तो अंदाज-ए-बयां का किस्सा अधूरा रह जाएगा। उनकी मुसव्वरी पर कोई बात की जाए तो उनके अंदर बेहतर बसने वाले इंसान की शख्सियत का जिक्र बाकी रह जायेगा। यह बातें अंतरराष्ट्रीय शायर मंजर भोपाली ने बुधवार को राहत के लिए आयोजित प्रोग्राम में कही। मंजर ने कहा एक इंसान में समाई हुई हजारों खासियतों का मुजस्समा थे डॉ राहत इंदौरी। आज वह भौतिक तौर हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका कलाम, उनकी बातें, उनकी अदा और अंदाज के साथ उनकी करोड़ों यादें हमेशा हमारे साथ रहने वाली हैं। इस मौके पर राहत इंदौरी की जिंदगी के अनछुए पहलुओं को दर्शाती एक पुस्तक राहत “अज़ीम फनकार बेमिसाल इंसान” का विमोचन भी किया गया।
पुस्तक उनके भानजे पत्रकार खान आशु ने कई पहलुओं को समाहित करते हुए लिखी है। कार्यक्रम में मौजूद शायरों में डॉ. महताब आलम, जफर सहबाई, जिया फारूकी आदि ने भी राहत की शख्सियत और उनकी बेबाक़ शायरी पर रोशनी डाली और उनके साथ गुजारे गए लम्हों की यादें शेयर की। कार्यक्रम में कांग्रेस प्रवक्ता मुनव्वर कौसर और आर्किटेक्ट एस एम हुसैन ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन बद्र वास्ती ने किया।

इस दौरान राहत इंदौरी के ज्येष्ठ पुत्र फ़ैसला राहत ने कहा कि राहत साहब केवल आँखों से ओझल हुए हैं, वे अब भी कई ज़रिए से हमारे साथ हैं और सदैव हमारे साथ रहने वाले हैं। फ़ैसल ने कहा कि उनकी लिखी पुस्तकें, उनके द्वारा पढ़ी जाने वाली किताबें, उनकी कलम, काग़ज़ से लेकर उनकी तस्वीरों का ज़ख़ीरा जमा करके उनको अपने घर की छत पर बनाए लाइब्रेरी में संजो कर रखा है। इस लाइब्रेरी में राहत की लिखी पहली ग़ज़ल संग्रह धूप धूप से लेकर अंतिम पुस्तक जिनमें मेरे बाद, नाराज़, पाँचवाँ दरवेश आदि शामिल हैं रखी जाएँगी। कार्यक्रम के संयोजक भोपाल के वरिष्ठ मुशाहिद सईद खान, वरिष्ठ पत्रकार जफर आलम खान, सैयद फैज अली, जावेद बेग, फरहान खान, अदनान खान, मोहम्मद शायान, शाहवेज सिकंदर आदि ने राहत इंदौरी को श्रद्धांजलि दी और कहा कि राहत का ये सिलसिला अब जारी रहेगा। साहित्य की महफिलों में शायर, कवि, पत्रकार, साहित्यकार याद किए जाते रहेंगे।