*आयुर्वेद का वरदान” स्वर्ण प्राशन” बच्चों के रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बेहतर विकल्प*

डॉo सुनील टंडन: असिस्टेंट प्रोफेसर(छत्तीसगढ़ आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल मनकी)

हेल्थ डेस्क (जर्नलिज्म टुडे): सुवर्णप्राशन- वर्तमान समय में सनातन धर्म के अनुयायी में गर्भाधान संस्कार से लेकर अंत्येष्टि क्रिया तक कुल 16 संस्कारों का वर्णन आता है उन 16 संस्कारों में स्वर्ण प्राशन एक प्रमुख संस्कार है। प्राचीन समय में किसी बालक का जन्म होता था तो पुश्तैनी रीति-रिवाजों के अनुसार शिशु को सोने की सलाई से बच्चों की जीभ पर शहद चाटने की परंपरा रहती थी। परंतु वर्तमान समय में या विरले ही देखने को मिलता है।

*स्वर्ण प्राशन का आयुर्वेद में वर्णन*

सुश्रुत संहिता व बाल रोग के ग्रंथ कश्यप संहिता में स्वर्ण प्राशन का वर्णन है जिसमें शुद्ध स्वर्ण भस्म को निश्चिंत अनुपात में महत्वपूर्ण जड़ी बूटियों से साधित घृत व शहद से निर्माण का उल्लेख है।

*पुष्य नक्षत्र में स्वर्ण प्राशन*

पुष्य नक्षत्र प्रत्येक मास में प्रति 27 वे दिन आता है। इस नक्षत्र पर सुवर्णप्राशन कराने से विशेष परिणाम देखने को मिलते हैं ।क्योंकि इस दिन ग्रहों की शक्तियां ज्यादा होती हैं ।

*स्वर्ण बिंदु प्राशना निर्माण विधि*

शुद्ध स्वर्ण भस्म को निश्चित अनुपात में महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधियां जैसे ब्राह्मी, अश्वगंधा ,गिलोय, शंखपुष्पी, वचा आदि औषधियों से साधित गौ घृत व शहद से निर्माण किया जाता है।

*स्वर्ण बिंदु प्रशना का निर्देश*

जन्म से लेकर 16 वर्ष की आयु तक स्वर्ण बिंदु प्राशना का निर्देश है जो बच्चों में होने वाली मौसमी बीमारी से रक्षा करता है बच्चों में शारीरिक एवं मानसिक गति में अच्छा सुधार होता है तथा विभिन्न रोगों से लड़ने की क्षमता पैदा करता है तथा बच्चे को स्वस्थ बनाने के साथ-साथ गुणकारी तेजस्वी ऊर्जावान और बलवान बनाने में मदद करता है ।

बालरोग विभाग मनकी राजनांदगांव आयुर्वेदिक अस्पताल में डॉक्टर द्वारा एक बच्चे को स्वर्ण प्राशन कराते हुए

*सुवर्णप्राशन कैसे किया जाता हैं ?*

1.बच्चों में सुवर्णप्राशन कराने का सबसे बेहतर समय सुबह खाली पेट सूर्योदय के पहले होता है।

2. 3 महीने रोजाना सुवर्णप्राशन कराने के बाद आप बच्चों को पुष्य नक्षत्र के दिन , सुवर्णप्राशन करा सकते हैं।

2. सुवर्णप्राशन करने के आधा घंटे पहले और आधा घंटे बाद तक कुछ खाना या पीना नहीं चाहिए।

4.अगर बच्चे ज्यादा बीमार है तो सुवर्णप्राशन नहीं कराना चाहिए।

*स्वर्णप्राशन पर आधुनिक शोध*

स्वर्ण प्राशन पर वैद्य,पीजीआई के डॉक्टरों और बायोमेडिकल रिसर्च के वैज्ञानिकों ने मिलकर शोध किया है। इसमें पुष्टि हुई है कि सुवर्णप्राशन में इम्यून सेल्स और टी सेल्स में इजाफा होता है जो की रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए महत्वपूर्ण है।

*गौ घृत और शहद के लाभ*

आधुनिक शोध रिसर्च के अनुसार घी में विघमान डी. एच .ए और ओमेगा 3 फैटी एसिड डेवलपिंग ब्रेन और रेटिनल टिशू के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देता है साथ ही साथ शहद और घी शरीर में रोगाणुओं से लड़ने के लिए शरीर में एंटीबॉडी की प्रक्रिया को उत्प्रेरित करते हैं।

*सुवर्णप्राशन संस्कार के क्या क्या लाभ है*

1. रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है अर्थात सामान्य बच्चों के अनुपात में बच्चे जल्दी से बीमार नहीं होते हैं।

2. मानसिक विकास होने से बालक की स्मरण शक्ति और बौद्धिक शक्ति में बढ़ोतरी होती हैं।

3. शारीरिक शक्ति में वृद्धि होती है जिससे बच्चों का बीएमआई अन्य सामान्य बच्चों से बेहतर होता है।

4. बच्चों की इंद्रियों की ग्रहण शक्ति का विकास होता है।

5. सुवर्णप्राशन से पाचन तंत्र मजबूत होता है ।

6. बच्चो का वर्ण सुधार कर शरीर मे कांति लाता है।

*नोट- स्वर्ण बिंदु प्राशना किसी अच्छे आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में किया जाना ही बेहतर होता है ।*

लेखक: डॉक्टर सुनील टंडन