नेता जी के साथी रहे अखिलेश भैय्या के है सारथी हाफिज मोहम्मद उस्मान।

समाजवादी पार्टी में मुस्लिम नेता, युवा नेता, बेहतरीन वक्ता, अनुभवी और सर्व मान्य समर्पित हाफिज मोहम्मद उस्मान को अब विधान परिषद में भी पार्टी द्वारा अवसर मिलना चाहिए।

हाफिज मोहम्मद उस्मान

जर्नलिज्म टुडे संवाददाता

लखनऊ: समाजवाद की इकलौती पैरोकार समाजवादी पार्टी ही दिख रही है। राम मनोहर लोहिया के जिन आदर्शों के लिए मुलायम सिंह यादव “नेता जी” संघर्ष कर समाजवाद को कायम रखने में कामयाब हुए, उसी मिशन की कमान अब युवा कंधो पर है। यानि कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर।

नेता जी का जितना बेहतरीन नेतृत्व था उतनी ही उनकी पारखी नजर भी थी। यह उनके पारखी नजर का ही कमाल था कि अलीगढ़ यूनिवर्सिटी का एक छात्र नेता की खूबियों को पहचाना। यह छात्र नेता अलीगढ़ यूनिवर्सिटी छात्र यूनियन का अध्यक्ष के साथ साथ वहां के कोर्ट के दो बार सदस्य भी रहा। यह युवा छात्र नेता अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अकादमिक कौंसिल के सदस्य रहे।इस युवा नेता ने जामिया अलीगढ़ से डी लिट की डिग्री हासिल की। इन्होंने समाजवादी पार्टी के गठन से पूर्व अलीगढ़ शहर से विधायक का चुनाव भी लड़ा।इस युवा का नाम है हाफिज मोहम्मद उस्मान। मोहम्मद उस्मान की काबिलियत, जन सेवा का भाव और जोश को देखते हुए पार्टी की स्थापना के साथ ही अपने साथ जोड़ लिया। नेता जी ने न सिर्फ पार्टी का संस्थापक सदस्य बनाया बल्कि समाजवादी पार्टी की सबसे मजबूत विंग समाजवादी युवजन सभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बनाया। समाजवादी युवजन सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि देश भर के युवाओं को पार्टी की ओर आकर्षित किया। हाफिज मोहम्मद उस्मान ने नेता के भरोसे को न सिर्फ कायम रखा बल्कि उस भरोसे को और आगे बढ़ाया।
नेता जी का यह युवा साथी का ही कमाल था कि नेता जी ने उन्हे अपने साथ काम करने के लिए समाजवादी पार्टी में अहम जिम्मेदारी दी। और समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय सचिव का भार सौंपा। समाजवादी पार्टी में तमाम उतार चढ़ाव आए, लेकिन युवा हाफिज उस्मान अडिग रहे और समाजवादी पार्टी के साथ खड़े रहे।
हाफिज मोहम्मद उस्मान की काबिलियत के चलते ही नेता जी ने उन्हे राज्यमंत्री से नवाजा। उनको उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड का चेयरमैन बनाया। वक्फ बोर्ड का कार्यकाल पूरा करने के बाद राज्य सूचना आयोग का आयुक्त ( कमिश्नर) की जिम्मेदारी सौंपी। जिसे पूरे कार्यकाल 5 वर्षों तक बखूबी निभाया। आप उत्तर प्रदेश हज कमेटी के चार बार सदस्य भी रहे।
नेता जी ने जब समाजवादी पार्टी की कमान उच्च शिक्षित, कर्मठ और प्रतिभावान अखिलेश यादव को सौंपी, तब भी हाफिज मोहम्मद उस्मान समाजवादी पार्टी और पार्टी अध्यक्ष के साथ कंधा से कंधा मिलाकर खड़े नजर आए। नेता जी के साथी हाफिज उस्मान हमेशा अखिलेश यादव के सारथी के रूप में खड़े रहते है।
हाफिज मोहम्मद उस्मान के व्यवहार की ही देन है कि वे युवाओं की आज भी धड़कन बने हुए है। साथ ही हिंदू मुस्लिम में भी हमेशा से स्वीकार रहे है।
सबसे बड़े सूबे के मुख्यमंत्री रहे और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष युवा और शिक्षित नेता अखिलेश यादव की पारखी नजर परिषद का सदस्य मनोनीत कर सकते है।
क्योंकि समाजवादी पार्टी में मुस्लिम नेता, युवा नेता, बेहतरीन वक्ता, अनुभवी और सर्व मान्य समर्पित समाजवादी हाफिज मोहम्मद उस्मान है। हाफिज मोहम्मद उस्मान के मजबूत होंगे उतने ही समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को बल मिलेगा।