पेट्रोल-डीजल का संकट नहीं, पर एलपीजी की किल्लत; सरकार ने की कोयला और केरोसीन की व्यवस्था.
सरकार ने लोगों से घबराहट में एलपीजी बुकिंग न करने की अपील की है
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार के विदेश, पेट्रोलियम और वाणिज्य मंत्रालयों ने एक साझा प्रेस वार्ता आयोजित की. इसमें क्षेत्र में फंसे भारतीयों की सुरक्षा, कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति और व्यापारिक मार्गों पर पड़ने वाले प्रभावों का विस्तृत विवरण दिया गया.
यहाँ दी गई प्रेस कॉन्फ्रेंस की मुख्य बातों का एक स्पष्ट और व्यवस्थित सारांश दिया गया है:
• पेट्रोल-डीज़ल में आत्मनिर्भरता: सरकार ने साफ़ किया है कि देश में पेट्रोल और डीज़ल की कोई कमी नहीं है। भारत के पास 258 मिलियन मीट्रिक टन की रिफ़ाइनिंग क्षमता है, जिससे हम इन ईंधनों के उत्पादन में आत्मनिर्भर हैं और हमें इनके आयात की आवश्यकता नहीं है।
• एलपीजी पर दबाव और अपील: मंत्रालय ने स्वीकार किया कि एलपीजी (रसोई गैस) की आपूर्ति पर वर्तमान में दबाव है। हालांकि, जनता से अपील की गई है कि वे ‘पैनिक बुकिंग’ (घबराहट में बुकिंग) न करें।
• वैकल्पिक उपाय: रसोई गैस की कमी को दूर करने के लिए वैकल्पिक इंतज़ाम किए जा रहे हैं, जिसमें कैरोसीन की सप्लाई बढ़ाना और कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है।
• पीएनजी और सीएनजी: ‘नेचुरल गैस कंट्रोल ऑर्डर’ के तहत घरों के लिए पीएनजी और वाहनों के लिए सीएनजी की सप्लाई बिना किसी कटौती के जारी रहेगी। सरकार ने सुझाव दिया है कि एलपीजी के विकल्प के रूप में लोग पीएनजी कनेक्शन अपना सकते हैं।
विपक्ष का रुख: देश भर में गैस के लिए लग रही लंबी कतारों के बीच विपक्षी दलों ने संसद में इस मुद्दे पर बहस की मांग की है और परिसर में विरोध प्रदर्शन भी किया है।
