चंद्रशेखर आजाद ने चुनाव आयोग पर उठाए गंभीर सवाल, सोशल मीडिया पर चिट्ठी पोस्ट कर मांगा जवाब

नई दिल्ली। भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक चिट्ठी पोस्ट कर निर्वाचन आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, मतदाता डेटा के केंद्रीकरण तथा चुनावी सॉफ्टवेयर से जुड़े मामलों में “अनधिकृत” और “अवैध” कदम उठाए जाने की आशंका जताई है। आजाद ने चुनाव आयोग और सरकार से इन मुद्दों पर जवाब मांगा है।
अपनी चिट्ठी में आजाद ने उल्लेख किया कि 26 सितंबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में निर्वाचन आयोग ने दावा किया था कि माननीय उच्चतम न्यायालय की मंजूरी के बाद फॉर्म-6 में बदलाव किया गया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया था कि अब SIR से पहले वाला फॉर्म-6 ही मान्य है और जिन मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, वे दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
हालांकि, 5 अक्टूबर 2026 को माननीय उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया कि फॉर्म-6 में किए गए किसी भी संशोधन को न्यायालय ने मंजूरी नहीं दी है। आजाद ने इस विरोधाभास को “बेहद चिंताजनक” बताते हुए कहा कि इससे निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने MyGovIndia को संबोधित करते हुए पांच प्रमुख माँगें रखी हैं—
पहली माँग: SIR के बाद हुए सभी चुनाव रद्द किए जाएँ, ताकि मतदाता सूची में अनियमितताओं से प्रभावित चुनावी प्रक्रिया पर जवाबदेही तय हो सके।
दूसरी माँग: पूरे मामले की जाँच माननीय मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली उच्चतम न्यायालय की पीठ की निगरानी में कराई जाए। यह पता लगाया जाए कि इस मामले में कौन-कौन लिप्त है, किसके निर्देश पर ये कदम उठाए गए और किन लोगों या राजनीतिक पक्षों को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से ऐसा किया गया। ज्ञानेश कुमार सहित सभी संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जाँच हो और दोषियों की जवाबदेही तय की जाए।
तीसरी माँग: वर्ष 2023 में चुनाव आयुक्तों से संबंधित कानून में किए गए बदलाव रद्द किए जाएँ। इस कानून के तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में किए गए बदलावों के साथ-साथ धारा 16 में आधिकारिक कार्यों के संबंध में दिए गए कानूनी संरक्षण के प्रावधान की भी समीक्षा हो और इसे रद्द किया जाए, ताकि चुनाव आयुक्तों की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
चौथी माँग: चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया निर्धारित करने के लिए संसद में विस्तृत चर्चा हो। राजीव कुमार के बाद ज्ञानेश कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त बने। भविष्य में भी नियुक्तियों के जरिए निर्वाचन आयोग पर सत्ता का प्रभाव पड़ने की आशंका को समाप्त करने के लिए पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था बनाई जाए।
पाँचवीं माँग: ईवीएम से चुनाव कराने की व्यवस्था समाप्त कर बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाएँ, ताकि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो तथा मतदाताओं का चुनाव प्रणाली पर विश्वास मजबूत हो।
चंद्रशेखर आजाद ने अपनी चिट्ठी के अंत में लिखा, “लोकतंत्र में मतदाता सूची के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर उठने वाले सवालों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। देश की जनता को सच्चाई जानने का अधिकार है और इसकी जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है।”
उन्होंने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से इन गंभीर मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा है।
