सिसोदिया का केंद्र सरकार पर निशाना, बोले- भाजपा से नहीं चल पा रही सरकार।
दिल्ली में गहराते बिजली संकट पर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने रविवार को प्रेस कांफ्रेंस की।

दिल्ली: सिसोदिया ने आगे कहा कि मुझे उनकी कांफ्रेंस देखकर बड़ा दुख हुआ कि केंद्र सरकार के मंत्री इतनी बड़ी गैरजिम्मेदाराना बात कह रहे हैं। जिस समय देश के कई मुख्यमंत्री केंद्र सरकार को आने वाले संकट को लेकर आगाह कर रहे हैं और कह रहे हैं कि इससे देश को बाहर निकालिए, वैसे में मंत्री कह रहे हैं कि कोई संकट ही नहीं है। और जो यह कह रहा है कि किल्लत है, वो गलत कर रहा है। यह देखकर मुझे बहुत दुख हुआ। इससे यह साफ दिख रहा है कि भारतीय जनता पार्टी आज ऐसी स्थिति में है कि उससे केंद्र सरकार चल नहीं रही है। वो बहाने खोज रहे हैं किल्लत से भागने के।
ऑक्सीजन किल्लत के समय भी आंख बंद करके बैठी रही सरकार
इनसे देश चल नहीं रहा। थोड़े दिन पहले देश में जब ऑक्सीजन की किल्लत हुई थी तो सबने शोर मचाया, राज्यों ने, राज्य सरकार ने, डॉक्टरों ने, सबने कहा कि ऑक्सीजन की किल्लत हो गई है आप कुछ कीजिए। लेकिन केंद्र सरकार बहुत बेशर्मी से बोलती रही कि ऐसी कोई बात ही नहीं है। हमसब ने देखा कि ऑक्सीजन की किल्लत से कितना हाहाकार मचा। हजारों लोगों को जानें गंवानी पड़ी क्योंकि केंद्र सरकार ठीक समय पर आंख बंद करके मुंह फेरकर बैठी रही।
देश को झेलना पड़ेगा बहुत बड़ा संकट
अभी फिर एक बार वही परिस्थिति आन पड़ी है। पूरे देश से आवाज उठ रही है कि कोयले की किल्लत है, जो अंतत: बिजली की किल्लत में बदल जाएगी। इसका बहुत बड़ा संकट देश को झेलना पड़ेगा। अगर ऐसा हुआ तो देश ठप्प हो जाएगा। और ऐसे में भी केंद्र सरकार फिर से बेशर्मी से कह रही है कि ऐसी कोई बात नहीं है। राज्य सरकारें और दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल गलत कर रहे हैं। ये आंखें बंद करने की जो नीति है वो बहुत घातक साबित हुई है पूर्व में भी और अब भी हो सकती है।
कम से कम समस्या को स्वीकार तो कीजिए
सिसोदिया ने कहा कि ये केवल कोयले की किल्लत भर नहीं है। इसका असर बिजली, सप्लाई, इंडस्ट्री, आईटी हर जगह पड़ेगा। केंद्र सरकार देश को गड्ढे में डालना चाहती है। देश को एकदम ठप्प कर देना चाहती है। आज दिल्ली और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने केंद्र को लिखा है। इसके अलावा पंजाब, यूपी और राजस्थान की सरकार भी कह रही है कि किल्लत है। फिर भी केंद्र सरकार कुछ नहीं कर रही है। इसका मतलब है कि उनके पास कोई समाधान नहीं है कोई हल नहीं है। अगर समस्या का उपाय नहीं भी है तो पहले उसे स्वीकार तो कीजिए।
